लिप्यंतरण:( Fa innamaa yassarnaahu bilisaanika la'allahum yatazakkaroon )
51. इब्ने अब्बास रज़ियल्लाहु अन्हुमा कहते हैं कि नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम की सभा में यहूदी भी आ जाते थे। और मुसलमानों को आपसे कोई बात समझनी होती तो "राइना" कहते, अर्थात हम पर ध्यान दीजिए, या हमारी बात सुनिए। इब्रानी भाषा में इसका बुरा अर्थ भी निकलता था, जिससे यहूदी प्रसन्न होते थे। इसलिए मुसलमानों को आदेश दिया गया कि इसके स्थान पर तुम "उन्ज़ुरना" कहा करो। अर्थात हमारी ओर देखिए। (तफ़्सीर क़ुर्तुबी)
The tafsir of Surah Ad-Dukhan verse 58 by Ibn Kathir is unavailable here.
Please refer to Surah Dukhan ayat 51 which provides the complete commentary from verse 51 through 59.

सूरा अद-दुख़ान आयत 58 तफ़सीर (टिप्पणी)