लिप्यंतरण:( Summa laa yamootu feehaa wa laa yahyaa )
4. (9-13) इनमें बताया गया है कि आपको मात्र इसका प्रचार-प्रसार करना है। और इसकी सरल राह यह है कि जो सुने और मानने के लिए तैयार हो, उसे शिक्षा दी जाए। किसी के पीछे पड़ने की आवश्यकता नहीं है। जो हत्भागे हैं, वही नहीं सुनेंगे और नरक की यातना के रूप में अपना दुष्परिणाम देखेंगे।
The tafsir of Surah Al-Ala verse 13 by Ibn Kathir is unavailable here.
Please refer to Surah Al-Ala ayat 1 which provides the complete commentary from verse 1 through 13.

सूरा अल-आला आयत 13 तफ़सीर (टिप्पणी)