लिप्यंतरण:( Fir'awna wa Samood )
4. (17-18) इनमें अतीत की कुछ अत्याचारी जातियों की ओर संकेत है, जिनका सविस्तार वर्णन क़ुरआन की अनेक सूरतों में आया है। जिन्होंने आस्तिकों पर अत्याचार किए, जैसे मक्का के क़ुरैश मुसलमानों पर कर रहे थे। जबकि उनको पता था कि पिछली जातियों के साथ क्या हुआ। परंतु वे अपने परिणाम से ग़ाफ़िल थे।
The tafsir of Surah Al-Buruj verse 18 by Ibn Kathir is unavailable here.
Please refer to Surah Buruj ayat 11 which provides the complete commentary from verse 11 through 22.

सूरा अल-बुरूज आयत 18 तफ़सीर (टिप्पणी)