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कुरान मजीद-89:14 सुरा अल-फज्र हिंदी अनुवाद, लिप्यंतरण और तफ़सीर (तफ़सीर).

إِنَّ رَبَّكَ لَبِٱلۡمِرۡصَادِ

लिप्यंतरण:( Inna Rabbaka labil mirsaad )

निःसंदेह तेरा पालनहार निश्चय घात में है।[2]

सूरा अल-फज्र आयत 14 तफ़सीर (टिप्पणी)



  • मुफ़्ती अहमद यार खान

2. (6-14) इन आयतों में उन जातियों की चर्चा की गई है, जिन्होंने माया मोह में पड़कर परलोक और प्रतिफल का इनकार किया, और अपने नैतिक पतन के कारण धरती में उग्रवाद किया। "आद, इरम" से अभिप्रेत वह पुरानी जाति है जिसे क़ुरआन तथा अरब में "आदे ऊला" (प्रथम आद) कहा गया है। यह वह प्राचीन जाति है जिसके पास हूद (अलैहिस्सलाम) को भेजा गया। और इनको "आदे इरम" इस लिए कहा गया है कि यह शामी वंशक्रम की उस शाखा से संबंधित थे जो इरम बिन शाम बिन नूह़ से चली आती थी। आयत संख्या 11 में इसका संकेत है कि उग्रवाद का उद्गम भौतिकवाद एवं सत्य विश्वास का इनकार है, जिसे वर्तमान युग में भी प्रत्यक्ष रूप में देखा जा सकता है।

Ibn-Kathir

The tafsir of Surah Fajr verse 14 by Ibn Kathir is unavailable here.
Please refer to Surah Fajr ayat 1 which provides the complete commentary from verse 1 through 14.

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