लिप्यंतरण:( Summa inna 'alainaa hisaabahum )
4. (21-26) इन आयतों का भावार्थ यह है कि क़ुरआन किसी को बलपूर्वक मनवाने के लिए नहीं है, और न नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम का यह कर्तव्य है कि किसी को बलपूर्वक मनवाएँ। आप जिससे डरा रहे हैं, ये मानें या न मानें, वह खुली बात है। फिर भी जो नहीं सुनते उनको अल्लाह ही समझेगा। ये और इस जैसी क़ुरआन की अनेक आयतें इस आरोप का खंडन करती हैं कि इस्लाम ने अपने मनवाने के लिए अस्त्र शस्त्र का प्रयोग किया है।
The tafsir of Surah Ghashiyah 26 verse by Ibn Kathir is unavailable here.
Please refer to Surah Ghashiyah ayat 17 which provides the complete commentary from verse 17 through 26.
सूरा अल-ग़ाशिया आयत 26 तफ़सीर (टिप्पणी)