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कुरान मजीद-46:4 सुरा अल-अहक़ाफ़ हिंदी अनुवाद, लिप्यंतरण और तफ़सीर (तफ़सीर).

قُلۡ أَرَءَيۡتُم مَّا تَدۡعُونَ مِن دُونِ ٱللَّهِ أَرُونِي مَاذَا خَلَقُواْ مِنَ ٱلۡأَرۡضِ أَمۡ لَهُمۡ شِرۡكٞ فِي ٱلسَّمَٰوَٰتِۖ ٱئۡتُونِي بِكِتَٰبٖ مِّن قَبۡلِ هَٰذَآ أَوۡ أَثَٰرَةٖ مِّنۡ عِلۡمٍ إِن كُنتُمۡ صَٰدِقِينَ

लिप्यंतरण:( Qul ara'aytum maa tad'oona min doonil laahi aroonee maazaa khalaqoo minal ardi am lahum shirkun fis samaawaati eetoonee bi kitaabim min qabli haazaaa aw asaaratim min 'ilmin in kuntum saadiqeen )

(ऐ रसूल!) आप कह दें : क्या तुमने उन चीज़ों को देखा जिन्हें तुम अल्लाह के सिवा पुकारते हो, मुझे दिखाओ कि उन्होंने धरती की कौन-सी चीज़ पैदा की है, या आसमानों में उनका कोई हिस्सा है? मेरे पास इससे पहले की कोई किताब[1], या ज्ञान की कोई अवशेष बात[2] ले आओ, यदि तुम सच्चे हो।

सूरा अल-अहक़ाफ़ आयत 4 तफ़सीर (टिप्पणी)



  • मुफ़्ती अहमद यार खान

1. अर्थात यदि तुम्हें मेरी शिक्षा का सत्य होना स्वीकार नहीं, तो किसी धर्म की आकाशीय पुस्तक ही से सिद्ध करके दिखा दो कि सत्य की शिक्षा कुछ और है। और यह भी न हो सके, तो किसी ज्ञान पर आधारित कथन और रिवायत ही से सिद्ध कर दो कि यह शिक्षा पूर्व के नबियों ने नहीं दी है। अर्थ यह है कि जब आकाशों और धरती की रचना अल्लाह ही ने की है तो उसके साथ दूसरों को पूज्य क्यों बनाते हो? 2. अर्थात इससे पहले वाली आकाशीय पुस्तकों का।

Ibn-Kathir

The tafsir of Surah Ahqaf verse 4 by Ibn Kathir is unavailable here.
Please refer to Surah Ahqaf ayat 1 which provides the complete commentary from verse 1 through 6.

सूरा अल-अहक़ाफ़ सभी आयत (छंद)

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