लिप्यंतरण:( Wa suyyi raatil jibaalu fa kaanat saraaba )
3. (17-20) इन आयतों में बताया जा रहा है कि निर्णय का दिन अपने निश्चित समय पर आकर रहेगा, उस दिन आकाश तथा धरती में एक बड़ी उथल-पुथल होगी। इसके लिए सूर में एक फूँक मारने की देर है। फिर जिसकी सूचना दी जा रही है तुम्हारे सामने आ जाएगी। तुम्हारे मानने या न मानने का कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा। और सब अपना ह़िसाब देने के लिए अल्लाह के न्यायालय की ओर चल पड़ेंगे।
The tafsir of Surah Naba verse 19 by Ibn Kathir is unavailable here.
Please refer to Surah Naba ayat 17 which provides the complete commentary from verse 17 through 30.

सूरा अन्नबा आयत 20 तफ़सीर (टिप्पणी)