लिप्यंतरण:( Zaalikal yaumul haqqu faman shaa-at ta khaaza ill-laa rabbihi ma-aaba )
5. (37-39) इन आयतों में अल्लाह के न्यायालय में उपस्थिति (ह़ाज़िरी) का चित्र दिखाया गया है। और जो इस भ्रम में पड़े हैं कि उनके देवी-देवता आदि अभिस्ताव करेंगे उनको सावधान किया गया है कि उस दिन कोई बिना उस की आज्ञा के मुँह नहीं खोलेगा और अल्लाह की आज्ञा से अभिस्ताव भी करेगा तो उसी के लिए जो संसार में सत्य वचन "ला इलाहा इल्लल्लाह" को मानता हो। अल्लाह के द्रोही और सत्य के विरोधी किसी अभिस्ताव के योग्य नगीं होंगे।
The tafsir of Surah Naba verse 39 by Ibn Kathir is unavailable here.
Please refer to Surah Naba ayat 37 which provides the complete commentary from verse 37 through 40.

सूरा अन्नबा आयत 39 तफ़सीर (टिप्पणी)