लिप्यंतरण:( In naa anzar naakum azaaban qareebaiy-yauma yan zurul marr-u maa qaddamat yadaahu wa ya qoolul-kaafiru yaa lai tanee kuntu turaaba (section 2) )
6. (40) बात को इस चेतावनी पर समाप्त किया गया है कि जिस दिन के आने की सूचना दी जा रही है, उस का आना सत्य है, उसे दूर न समझो। अब जिसका दिल चाहे इसे मानकर अपने पालनहार की ओर मार्ग बना ले। परंतु इस चेतावनी के होते जो इनकार करेगा, उसका किया-धरा सामने आएगा, तो पछता-पछता कर यह कामना करेगा कि मैं संसार में पैदा ही न होता। उस समय इस संसार के बारे में उसका यह विचार होगा जिसके प्रेम में आज वह परलोक से अंधा बना हुआ है।
The tafsir of Surah Naba verse 40 by Ibn Kathir is unavailable here.
Please refer to Surah Naba ayat 37 which provides the complete commentary from verse 37 through 40.

सूरा अन्नबा आयत 40 तफ़सीर (टिप्पणी)