लिप्यंतरण:( Fa zooqoo falan-nazee dakum ill-laa azaaba (section 1) )
4. (21-30) इन आयतों में बताया गया है कि जो ह़िसाब की आशा नहीं रखते और हमारी आयतों को नहीं मानते हमने उनकी एक-एक करतूत को गिनकर अपने यहाँ लिख रखा है। और उनकी ख़बर लेने के लिए नरक घात लगाए तैयार है, जहाँ उनके कुकर्मों का भरपूर बदला दिया जाएगा।
The tafsir of Surah Naba verse 29 by Ibn Kathir is unavailable here.
Please refer to Surah Naba ayat 17 which provides the complete commentary from verse 17 through 30.

सूरा अन्नबा आयत 30 तफ़सीर (टिप्पणी)