लिप्यंतरण:( Fa atharna bihee naq'a )
अल्लाह के रास्ते में प्रिय धूल और आंसू (The Beloved Dust and Tears in the Path of Allah)
इस आयत में, अल्लाह तआला पवित्र युद्ध के दौरान घोड़ों द्वारा उबली हुई धूल को अपने लिए प्रिय बताते हैं। यह धूल इस्लाम की सेवा में किए गए संघर्ष और प्रयासों का प्रतीक है। यह केवल शारीरिक प्रयास नहीं, बल्कि आत्मिक बलिदान को भी दर्शाता है।
अल्लाह के रास्ते में बलिदान (Sacrifice in the Path of Allah)
पवित्र युद्ध में उबली हुई धूल उन सैनिकों के संघर्षों का प्रतीक है जो अल्लाह के रास्ते में लड़ रहे हैं। यह प्रयास सिर्फ शारीरिक नहीं है, बल्कि आत्मिक रूप से महत्वपूर्ण है क्योंकि यह दिव्य सेवा में किया गया है।
अल्लाह के रास्ते में लड़ाई को सबसे महान इबादतों में से एक माना जाता है, और इस दौरान जो शारीरिक कष्ट होते हैं, वे अल्लाह के लिए पसंदीदा होते हैं।
अल्लाह के डर और प्रेम से आंसू (Tears of Fear and Love for Allah)
यहाँ अल्लाह के डर से बहाए गए आंसुओं का भी उल्लेख है। ये आंसू विनम्रता, तौबा (repentance) और अल्लाह के प्रति प्रेम का प्रतीक होते हैं। यह इबादत का एक रूप है जो दिल और आत्मा को पाक करता है।
अल्लाह के डर और भक्ति से बहाए गए ये आंसू जहन्नम की आग को बुझाने का कार्य करते हैं, जो उनके विशाल आत्मिक पुरस्कार को दर्शाता है। यह पापों के परिणाम से बचाव का एक तरीका होते हैं और अल्लाह की दया प्राप्त करने का एक साधन हैं।
धूल का प्रतीक (Symbolism of Dust)
युद्ध में उठी धूल अल्लाह के रास्ते में किए गए संघर्ष और प्रयास का प्रतीक है। हर एक प्रयास जो सत्य की स्थापना और अच्छाई को बढ़ावा देने के लिए किया जाता है, चाहे वह किसी भी कठिनाई का सामना कर रहा हो, अल्लाह की नज़रों में अत्यधिक मूल्यवान होता है।
यह हमें यह सिखाता है कि एक महान उद्देश्य के लिए प्रयास करना, चाहे वह शारीरिक श्रम हो, बलिदान हो, या कठिन परिस्थितियाँ हो, अल्लाह के लिए जब किया जाता है, तो यह अत्यधिक प्रिय होता है।
अल्लाह के डर और तौबा से बहाए गए आंसू (Tears of Fear and Repentance)
अल्लाह के डर से बहाए गए आंसू सबसे महान आध्यात्मिक पवित्रता के रूप होते हैं। ये आंसू अल्लाह के साथ एक सच्चे संबंध को दर्शाते हैं, जिसमें विश्वास करने वाला अपने दोषों को स्वीकार करता है और अल्लाह से माफी माँगता है।
ये आंसू जहन्नम की आग से मुक्ति का प्रतीक होते हैं और सच्चे तौबा का संकेत देते हैं।
बलिदान का महत्व (Value of Sacrifice)
अल्लाह के लिए किया गया हर संघर्ष, चाहे वह कितना भी छोटा क्यों न हो, आध्यात्मिक महत्व रखता है। इस्लाम के रास्ते में शारीरिक प्रयास एक ऐसी इबादत है जिसे अल्लाह बहुत अधिक महत्व देता है।
आंसुओं के माध्यम से पवित्रता (Purification Through Tears)
तौबा के आंसू अल्लाह की दया प्राप्त करने का एक प्रभावी तरीका हैं। विश्वासियों को चाहिए कि वे अपना दिल पाक रखें और जब भी वे अपने पापों पर पछताएं, तो अल्लाह की खुशी के लिए आंसू बहाएं।
ऐसे आंसू कमजोरी का प्रतीक नहीं होते, बल्कि विश्वास में मजबूती का प्रतीक होते हैं, जो अल्लाह के पास लौटने और आत्मिक शुद्धता प्राप्त करने के एक सच्चे प्रयास को दर्शाते हैं।
पवित्र युद्ध में उबली हुई धूल और अल्लाह के डर से बहाए गए आंसू, बलिदान और तौबा के आध्यात्मिक पुरस्कारों को उजागर करते हैं। दोनों ही इबादत और संघर्ष के रूप हैं जिन्हें अल्लाह तआला अत्यधिक महत्व देते हैं। विश्वासियों को अल्लाह के रास्ते में निस्वार्थ प्रयास करने और तौबा के आंसू बहाने के लिए प्रेरित किया जाता है, क्योंकि ये दोनों ही अल्लाह की दया प्राप्त करने और जहन्नम के सज़ा से बचने के साधन हैं।
The tafsir of Surah Adiyat verse 4 by Ibn Kathir is unavailable here.
Please refer to Surah Adiyat ayat 1 which provides the complete commentary from verse 1 through 11.

सूरा आयत 4 तफ़सीर (टिप्पणी)