सूरह आदियात: कठोरता और धन से प्रेम
(Surah Adiyat: Hard-Heartedness and Love for Wealth)
यह आयत इंसानों के कठोर स्वभाव पर रौशनी डालती है और समझाती है कि सांसारिक धन-दौलत का अत्यधिक मोह दिल को कठोर बना देता है। यह मोह आत्मिक विकास (spiritual growth) में रुकावट बन जाता है। इसमें अल्लाह और उसके रसूल ﷺ से प्रेम के माध्यम से मिलने वाली कोमलता और दया (compassion) का जिक्र है, जो इंसान को विनम्र और आत्मिक रूप से परिपक्व बनाती है।
मुख्य बातें (Key Insights):
कठोरता का कारण: धन से मोह
- धन का अत्यधिक प्रेम इंसान को कठोरदिल बना देता है।
- सांसारिक चीज़ों से लगाव इंसान को उच्च आत्मिक मूल्यों (spiritual values) से अंधा कर देता है।
- इससे इंसान नेकी (righteousness) और हमदर्दी (empathy) से दूर हो जाता है।
कठोरता बनाम कोमलता
इतिहास में कठोरदिल उदाहरण:
- फ़िरऔन, यज़ीद और शद्दाद जैसे लोग धन और ताकत के मोह के कारण जानवरों से भी ज्यादा कठोरदिल हो गए।
कोमलता का स्रोत:
- पैग़ंबर मुहम्मद ﷺ से प्रेम और धार्मिक समर्पण (devotion) इंसान को विनम्र और दयालु बनाता है।
- यह आत्मिक शुद्धता (spiritual refinement) लाने में मदद करता है।
धर्म और संसार के लिए बलिदान
- लोग धन और स्थिति (status) के लिए बड़ी मेहनत और तकलीफ़ें सहन करते हैं।
- लेकिन धर्म के लिए उतनी ही मेहनत और त्याग करने से कतराते हैं।
- यह दर्शाता है कि इंसान का दिल, जब सांसारिक मोह में पड़ जाता है, तो प्राथमिकताएं गलत हो जाती हैं।
धन से मोह के प्रकार
ईमान-आधारित मोह (Faith-Based Love):
- उद्देश्य: धन को नेकी और धर्म के कार्यों में लगाना, जैसे हज करना, ज़कात देना, या इस्लामी कामों को बढ़ावा देना।
- उदाहरण: हज़रत सुलेमान (अलैहिस्सलाम) ने संसाधनों को अल्लाह के धर्म की सेवा के लिए प्रिय बताया।
इंद्रियों की इच्छा (Sensual Desire):
- उद्देश्य: खुद की आराम और विलासिता के लिए धन की चाह।
- यह अक्सर आत्मसंतोष (complacency) और आलस्य की ओर ले जाता है।
गुनाह और बगावत का मोह (Love for Transgression):
- उद्देश्य: अवैध (illegitimate) तरीके से धन इकट्ठा करना।
- लालच और अहंकार से प्रेरित होता है।
शैतानी मोह (Satanic Love):
- उद्देश्य: गुनाह के कामों, अल्लाह की नाफ़र्मानी या दूसरों पर ज़ुल्म के लिए धन का उपयोग।
आयत का फोकस: आखिरी दो प्रकार, जो इंसान और समाज पर विनाशकारी प्रभाव डालते हैं।
धन: भलाई और बुराई का साधन
धन का सकारात्मक उपयोग:
- नेक नीयत से उपयोग करने पर धन अल्लाह की रज़ा (pleasure) पाने का साधन बनता है।
- पैग़ंबर मुहम्मद ﷺ को इस्लाम की सेवा में उपयोग किए जाने वाले संसाधन प्रिय थे।
धन का नकारात्मक प्रभाव:
- जब धन का प्रेम दिल पर हावी हो जाए और अल्लाह की मोहब्बत के लिए जगह न छोड़े, तो यह बुराई का स्रोत बन जाता है।
- सूफियों के अनुसार, ऐसा लगाव आत्मिक विकास में बाधा डालता है।
सूफी नज़रिया (Sufi Perspective):
संतुलित लगाव (Balanced Attachment):
- धन को भलाई के लिए एक साधन बनाए रखें, लेकिन इसे दिल पर हावी न होने दें।
- सूफियों का कहना है कि पानी जहाज़ के बाहर हो तो जहाज़ सुरक्षित रहता है, लेकिन अगर पानी अंदर चला जाए, तो जहाज़ डूब जाता है।
अल्लाह से शुद्ध प्रेम (Pure Love for Allah):
- दिल को अल्लाह की मोहब्बत के लिए समर्पित करें।
- सांसारिक मोहब्बतें अल्लाह की याद से ध्यान भटकाती हैं।
व्यावहारिक शिक्षा (Practical Lessons):
शुक्रगुज़ार बनें (Cultivate Gratitude):
- यह मानें कि धन और संसाधन अल्लाह की दी हुई नेमतें हैं।
- इन्हें ज़िम्मेदारी और शुक्र के साथ उपयोग करें।
लालच और संग्रह से बचें (Avoid Greed and Hoarding):
- धन केवल इकट्ठा करने या गुनाह के कामों के लिए न रखें।
धर्म को प्राथमिकता दें (Prioritize Religion Over Worldly Gains):
- धार्मिक फ़र्ज़ (obligations) और आत्मिक विकास के लिए त्याग करने को तैयार रहें।
संतुलन बनाए रखें (Maintain Balance):
- धन को अपना सेवक बनाएं, मालिक नहीं।
- इसे भलाई के कार्यों में लगाएं, लेकिन अपने दिल को इससे प्रभावित न होने दें।
नतीजा (Conclusion):
यह आयत हमें यह याद दिलाती है कि सांसारिक धन का अत्यधिक प्रेम दिल को कठोर और आत्मा को बर्बाद कर देता है। इसे संतुलन और नेकी के कार्यों में उपयोग करके इंसान अल्लाह की रज़ा पा सकता है। पैग़ंबर मुहम्मद ﷺ और अल्लाह की मोहब्बत दिल को कोमल बनाकर इंसान को दयालु और नेक इंसान बनाती है।
Ibn-Kathir
The tafsir of Surah Adiyat verse 8 by Ibn Kathir is unavailable here.
Please refer to Surah Adiyat ayat 1 which provides the complete commentary from verse 1 through 11.
सूरा आयत 8 तफ़सीर (टिप्पणी)