Quran Quote  : 

कुरान मजीद-90:12 सुरा हिंदी अनुवाद, लिप्यंतरण और तफ़सीर (तफ़सीर).

وَمَآ أَدۡرَىٰكَ مَا ٱلۡعَقَبَةُ

लिप्यंतरण:( Wa maaa adraaka mal'aqabah )

12. और तुम क्या जानो, ऊँचाई तक चढ़ना [12] क्या है?

सूरा आयत 12 तफ़सीर (टिप्पणी)



  • मुफ़्ती अहमद यार खान

आपकी जानकारी में चढ़ाई क्या है? (And what will make you know what the ascent is?)

यह आयत एक प्रश्न पूछती है, जो आध्यात्मिक ऊंचाईयों तक पहुँचने के लिए आवश्यक संघर्ष (struggle) और मेहनत (effort) को दर्शाती है। चढ़ाई यहाँ पर आध्यात्मिक और नैतिक उन्नति (growth) को दर्शाती है, जैसे पहाड़ चढ़ने के लिए ताकत और धैर्य (perseverance) की आवश्यकता होती है।

चढ़ाई (The Ascent)

  • \"चढ़ाई\" (ascent) का मतलब है आध्यात्मिक उन्नति (spiritual climb) जो righteousness और अल्लाह के करीब (closeness to Allah) जाने के लिए है। यह कोई शारीरिक पहाड़ (physical mountain) नहीं है, बल्कि यह एक रूपक (metaphor) है, जो उस संघर्ष (struggle) और मेहनत (efforts) को दर्शाता है, जो पवित्रता (piety) और अल्लाह की कृपा (divine favor) के लिए किया जाता है।
  • जैसे पहाड़ चढ़ने के लिए शक्ति (strength), संकल्प (determination), और धैर्य (perseverance) चाहिए, वैसे ही अल्लाह की कृपा पाने के लिए आध्यात्मिक यात्रा (spiritual journey) भी कठिन होती है। इसमें कठिनाइयों को पार करना, इच्छाओं (desires) पर काबू पाना, इबादत (acts of worship) करना और मुश्किलों का सामना करना शामिल है।

समझने की कठिनाई (The Struggle to Understand)

  • यह प्रश्न इस बात को उजागर करता है कि बहुत से लोग आध्यात्मिक ऊंचाईयों तक पहुँचने के लिए जो कठिनाईयाँ और बलिदान (sacrifices) आवश्यक होते हैं, उनसे अनजान होते हैं। यह आयत बताती है कि आध्यात्मिक यात्रा के गहरे अर्थ और उसमें आने वाली कठिनाइयों (hardships) को समझने में बहुत से लोग लापरवाह होते हैं।
  • यह इस बात को इंगीत करती है कि हमें अपने विश्वास (faith) और नैतिकता (virtue) को बढ़ाने के लिए किए गए प्रयासों (efforts) की समझ होनी चाहिए।

आध्यात्मिक अर्थ (Spiritual Meaning)

  • चढ़ाई को आध्यात्मिक शुद्धता (spiritual purification) और विश्वास (faith) के मार्ग में बढ़ते हुए विकास (growth) के रूप में भी समझा जा सकता है। इसमें आत्म-अनुशासन (self-discipline), धैर्य (patience), समर्पण (devotion), और निरंतर संघर्ष (continuous striving) की आवश्यकता होती है, ताकि हम अल्लाह की मंजूरी (approval) प्राप्त कर सकें।
  • यह आयत हमें यह सोचने के लिए प्रेरित करती है कि इस तरह की ऊंचाईयों तक पहुँचने के लिए कितनी मेहनत और कठिनाइयाँ (hardships) आती हैं।

Ibn-Kathir

The tafsir of Surah Balad verse 12 by Ibn Kathir is unavailable here.
Please refer to Surah Balad ayat 11 which provides the complete commentary from verse 11 through 20.

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