Quran Quote  : 

कुरान मजीद-90:19 सुरा हिंदी अनुवाद, लिप्यंतरण और तफ़सीर (तफ़सीर).

وَٱلَّذِينَ كَفَرُواْ بِـَٔايَٰتِنَا هُمۡ أَصۡحَٰبُ ٱلۡمَشۡـَٔمَةِ

लिप्यंतरण:( Wallazeena kafaroo bi aayaatinaa hum as-haabul Mash'amah )

19. लेकिन जो लोग हमारी आयतों का इनकार करते हैं; वे बाएं हाथ वाले लोग हैं [21]।

सूरा आयत 19 तफ़सीर (टिप्पणी)



  • मुफ़्ती अहमद यार खान

19.  बदशगुनी (मैमाना) और बदशगुनी के परिणाम
(The Inauspicious (Maimanah) and the Consequences of Inauspiciousness)

यह आयत माशमा (जो बाएं हाथ वाले हैं) और मैमाना (जो दाएं हाथ वाले हैं) के बीच अंतर बताती है, और उन लोगों के दुर्भाग्यपूर्ण भाग्य पर प्रकाश डालती है जो अपनी जिम्मेदारियों को नज़रअंदाज़ करते हैं और उनके कर्मों के परिणामों को समझते हैं।

माशमा (जो बाएं हाथ वाले हैं):
(Mashamah - Those on the Left)
यह वे लोग हैं जो क़ियामत के दिन अपने कर्मों की किताब बाएं हाथ में प्राप्त करेंगे।
वे दैवीय सिंहासन के बाएं ओर खड़े होंगे, जो उनके दुर्भाग्य और अल्लाह की रहमत से दूर होने का प्रतीक है।
यह लोग अशुभ माने जाते हैं, क्योंकि उन्होंने अपनी ज़िन्दगी को सही तरीके से मूल्यांकित नहीं किया या अपने अच्छे कर्मों से पूरा लाभ नहीं उठाया।

कुफ्र (इन्कार) की बदशगुनी:
(Inauspiciousness of Infidelity)
कुफ्र (इन्कार) को सबसे बड़ी बदशगुनी माना गया है, क्योंकि यह अल्लाह की हिदायत और रहमत से अलगाव का कारण बनता है।
इसके विपरीत, इमान (विश्वास) एक आशीर्वाद है जो व्यक्ति को अल्लाह के करीब लाता है और उसे शाश्वत सफलता की ओर ले जाता है।

बदशगुनी वाले कर्म:
(Inauspicious Deeds)
यह आयत कुछ ऐसे कर्मों को उजागर करती है जिन्हें अशुभ माना जाता है और जो किसी के आध्यात्मिक कल्याण पर असर डाल सकते हैं:

  • इशा नमाज के बिना सो जाना: रात की नमाज को न पढ़ना आध्यात्मिक रूप से हानिकारक माना जाता है।
  • फजर नमाज के समय सोना: सुबह की नमाज न पढ़ना लापरवाही का प्रतीक है।
  • माता-पिता की नाफरमानी: यह एक महत्वपूर्ण आध्यात्मिक उलटफेर है, क्योंकि इस्लाम में माता-पिता का आदर करना एक महत्वपूर्ण सिद्धांत है।
  • खाने के बाद झाड़ू लगाना: कुछ संदर्भों में इसे अशुभ या अवहेलना माना जाता है।
  • प्याज के बाहरी हिस्से को जलाना: इसे आध्यात्मिक रूप से हानिकारक कर्मों के रूप में उल्लेखित किया गया है।

सीखने के पाठ:
(Lessons to be Learned)
यह आयत इमान और धार्मिकता को बनाए रखने और अशुभ कर्मों से बचने के महत्व पर जोर देती है।
यह बड़े और छोटे, मामूली से दिखने वाले कर्मों की आवश्यकता को समझाती है जो या तो आशीर्वाद लाते हैं या दुर्भाग्य।

Ibn-Kathir

The tafsir of Surah Balad verse 19 by Ibn Kathir is unavailable here.
Please refer to Surah Balad ayat 11 which provides the complete commentary from verse 11 through 20.

सूरा सभी आयत (छंद)

1
2
3
4
5
6
7
8
9
10
11
12
13
14
15
16
17
18
19
20

Sign up for Newsletter