लिप्यंतरण:( Lillaahi mulkus samaawaati wal ardi wa maa feehinn; wa Huwa 'alaa kulli shai'inn Qadeer )
आसमानों और ज़मीन और जो कुछ इनमें है — सब पर मालिकाना हक़ अल्लाह का है [329], और वह हर चीज़ पर क़ादिर है [330]।
यहाँ "मल्क" (बादशाही) का मतलब सिर्फ़ ज़ाहिरी हुकूमत नहीं, बल्कि असली और हक़ीकी मालिकियत है। इंसानों को कुछ वक़्ती तौर पर बादशाही मिलती है, लेकिन पैदाइश, मौत, तक़दीर का बदलना, दिलों का पलटना — ये सब सिर्फ़ अल्लाह के इख़्तियार में है।
पैग़ंबर और औलिया अल्लाह सिर्फ़ वसीला बन सकते हैं, लेकिन असल ताक़त और अम्र सिर्फ़ अल्लाह के पास है।
"हर चीज़ पर क़ादिर है" का मतलब है कि अल्लाह हर उस चीज़ पर क़ुदरत रखता है जो मुमकिन और अक़्ली (तर्कसंगत) हो।
ऐसी बातें जो नामुमकिन या अल्लाह की ज़ात से टकराती हों — जैसे कि अल्लाह झूठ बोले या कोई गोल चौरस बनाए — ये उसकी क़ुदरत के दायरे में नहीं आतीं, क्योंकि वो उसकी हिकमत और कमाल के ख़िलाफ़ हैं।
अल्लाह की क़ुदरत बे-हद है, लेकिन वो हमेशा हिकमत और इनसाफ़ के साथ इस्तेमाल होती है।
The tafsir of Surah Maidah verse 120 by Ibn Kathir is unavailable here.
Please refer to Surah Maidah ayat 119 which provides the complete commentary from verse 119 through 120.

सूरा आयत 120 तफ़सीर (टिप्पणी)