Quran Quote  : 

कुरान मजीद-5:66 सुरा हिंदी अनुवाद, लिप्यंतरण और तफ़सीर (तफ़सीर).

وَلَوۡ أَنَّهُمۡ أَقَامُواْ ٱلتَّوۡرَىٰةَ وَٱلۡإِنجِيلَ وَمَآ أُنزِلَ إِلَيۡهِم مِّن رَّبِّهِمۡ لَأَكَلُواْ مِن فَوۡقِهِمۡ وَمِن تَحۡتِ أَرۡجُلِهِمۚ مِّنۡهُمۡ أُمَّةٞ مُّقۡتَصِدَةٞۖ وَكَثِيرٞ مِّنۡهُمۡ سَآءَ مَا يَعۡمَلُونَ

लिप्यंतरण:( Wa law annahum aqaamut Tawraata wal Injeela wa maaa unzila ilaihim mir Rabbihim la akaloo min fawqihim wa min tahti arjulihim; minhum ummatum muqta sidatunw wa kaseerum minhum saaa'a maa ya'maloon )

"और अगर वह लोग तौरेत [198] और इंजील को और जो कुछ उनके रब की तरफ़ से उनकी तरफ़ नाज़िल किया गया है, उसको क़ायम रखते, तो यक़ीनन वो अपने ऊपर से और अपने पांवों के नीचे से रिज़्क़ खाते [199]। उनमें एक मध्यम मार्ग पर चलने वाली जमाअत भी है, मगर उनमें से अक्सर लोग बुरे काम कर रहे हैं [200]।"

सूरा आयत 66 तफ़सीर (टिप्पणी)



  • मुफ़्ती अहमद यार खान

📖 सूरा अल-माइदा – आयत 66 की तफ़्सीर

 

✅ [198] "अगर वह तौरेत और इंजील को क़ायम रखते…"

  • इसका मतलब है कि अगर अहले किताब ने इन किताबों की हिदायत पर अमल किया होता, और उन किताबों में दर्ज रसूलुल्लाह ﷺ की नबूवत को माना होता,
  • तो वो सही राह पर होते। इन किताबों में अंतिम रसूल की पहचान दी गई थी, जिसे उन्होंने छुपा लिया।

✅ [199] "अपने ऊपर से और पांवों के नीचे से रिज़्क़ खाते…"

  • अगर वह लोग तौहिद और इताअत की राह पर चलते,
  • तो अल्लाह उन्हें बरसात से आसमानी बरकतें देता और ज़मीन से पैदावार भी देता।
  • यह बताता है कि अल्लाह की हिदायत अपनाने से रिज़्क़ में बढ़ोतरी और दुनियावी भलाई हासिल होती है।

✅ [200] "उनमें एक मध्यम मार्ग पर चलने वाली जमाअत है…"

  • सब लोग गुमराह या ज़ालिम नहीं होते।
  • कुछ लोग, जैसे हज़रत अब्दुल्लाह बिन सलाम (रज़ि.), ईमान लाए और रास्तबाज़ बने।
  • लेकिन अधिकांश लोग अब भी नाफ़रमानी और बुरे कामों में लगे हुए हैं।

Ibn-Kathir

The tafsir of Surah Maidah verse 66 by Ibn Kathir is unavailable here.
Please refer to Surah Maidah ayat 64 which provides the complete commentary from verse 64 through 66.

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