Quran Quote  : 

कुरान मजीद-5:69 सुरा हिंदी अनुवाद, लिप्यंतरण और तफ़सीर (तफ़सीर).

إِنَّ ٱلَّذِينَ ءَامَنُواْ وَٱلَّذِينَ هَادُواْ وَٱلصَّـٰبِـُٔونَ وَٱلنَّصَٰرَىٰ مَنۡ ءَامَنَ بِٱللَّهِ وَٱلۡيَوۡمِ ٱلۡأٓخِرِ وَعَمِلَ صَٰلِحٗا فَلَا خَوۡفٌ عَلَيۡهِمۡ وَلَا هُمۡ يَحۡزَنُونَ

लिप्यंतरण:( Innal lazeena aamanoo wallazeena haadoo was saabi'oona wan Nasaaraa man aamana billaahi wal yawmil Aakhiri wa 'amila saalihan falaa khawfun 'alaihim wa laa hum yahzanoon )

"बेशक जो लोग ईमान लाए, और जो यहूद हैं, और साबिईन और नसरानी—इनमें से जो कोई भी अल्लाह और आख़िरत के दिन पर सच्चे दिल से ईमान लाए और नेक अमल करे, तो उन पर कोई खौफ़ नहीं होगा और न ही वे ग़मगीन होंगे [210]।"

सूरा आयत 69 तफ़सीर (टिप्पणी)



  • मुफ़्ती अहमद यार खान

📖 सूरा अल-माइदा – आयत 69 की तफ़्सीर

 

✅ [208] "जो ईमान लाए…"

  • यहां सिर्फ नाम का मुसलमान होना मुराद नहीं, बल्कि दिल से सच्चा ईमान रखने वाले की बात हो रही है।
  • जो सिर्फ जुबान से कलिमा पढ़े लेकिन दिल में निफ़ाक़ (पाखंड) रखे, वह इस वादे में शामिल नहीं।
  • ऐसे नामी मुस्लिम फ़िर्क़ों (जैसे क़ादियानी या चकरालविक) का ज़िक्र भी है, जिनके पास हक़ीकी ईमान नहीं है।

✅ [209] "यहूद, नसरानी, साबिईन…"

  • इन क़ौमों में से अगर कोई सच्चे दिल से अल्लाह और आख़िरत पर ईमान लाए, और नेक अमल करे, तो वह भी अल्लाह के इनाम का हक़दार है।
  • क़ौमी या मज़हबी पहचान खुद से नजात (छुटकारा) की गारंटी नहीं है; सच्चा ईमान और अच्छे अमल ही असल चीज़ है।

✅ [210] "ना कोई खौफ़ होगा, ना ग़म…"

  • अल्लाह का डर (तक़वा) और सच्चा ईमान इंसान को दुनिया और आख़िरत दोनों में सुकून और बेखौफ़ी देता है।
  • ऐसे लोग वली (अल्लाह के दोस्त) माने जाते हैं, जिनके लिए कोई डर नहीं और कोई ग़म नहीं

Ibn-Kathir

The tafsir of Surah Maidah verse 69 by Ibn Kathir is unavailable here.
Please refer to Surah Maidah ayat 68 which provides the complete commentary from verse 68 through 69.

Sign up for Newsletter