Quran Quote  : 

कुरान मजीद-5:81 सुरा अल-मायदा हिंदी अनुवाद, लिप्यंतरण और तफ़सीर (तफ़सीर).

وَلَوۡ كَانُواْ يُؤۡمِنُونَ بِٱللَّهِ وَٱلنَّبِيِّ وَمَآ أُنزِلَ إِلَيۡهِ مَا ٱتَّخَذُوهُمۡ أَوۡلِيَآءَ وَلَٰكِنَّ كَثِيرٗا مِّنۡهُمۡ فَٰسِقُونَ

लिप्यंतरण:( Wa law kaanoo yu'minoona billaahi wan nabiyyi wa maaa unzila ilaihi mattakhazoohum awliyaaa'a wa laakinna kaseeram minhum faasiqoon (End Juz 6) )

और यदि वे अल्लाह और नबी पर और उसपर ईमान रखते होते जो उसकी ओर उतारा गया है, तो उन्हें मित्र न बनाते[52], लेकिन उनमें से बहुत से अवज्ञाकारी हैं।

सूरा अल-मायदा आयत 81 तफ़सीर (टिप्पणी)



  • मुफ़्ती अहमद यार खान

52. भावार्थ यह है कि यदि यहूदी, मूसा अलैहिस्सलाम को अपना नबी और तौरात को अल्लाह की किताब मानते, जैसा कि उनका दावा है, तो वे मुसलमानों को शत्रु और काफ़िरों को मित्र नहीं बनाते। क़ुरआन का यह सच आज भी देखा जा सकता है।

Ibn-Kathir

The tafsir of Surah Maidah verse 81 by Ibn Kathir is unavailable here.
Please refer to Surah Maidah ayat 78 which provides the complete commentary from verse 78 through 81.

सूरा अल-मायदा सभी आयत (छंद)

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