लिप्यंतरण:( Wa laa takoonoo kallazeena qaaloo sami'naa wa hum laa yasma'oon )
और उन लोगों की तरह न हो जाओ जो कहते हैं: हमने सुना, हालाँकि वह सुनते ही नहीं [45]।
यह आयत मुनाफ़िक़ों की हालत बयान करती है।
वह ज़बान से कहते थे "हमने सुना",
लेकिन उनके दिल बन्द रहते और वह अमल नहीं करते।
असल मायने में उन्होंने न हक़ को समझा और न माना।
मोमिनों को ताकीद की गई कि इस तरह का झूठा सुनना न अपनाएँ।
सच्चा सुनना वही है, जिसमें क़बूल करना, तफ़क्कुर करना और इताअत करना शामिल हो।
The tafsir of Surah Al-Anfal verse 21 by Ibn Kathir is unavailable here.
Please refer to Surah Anfal ayat 20 which provides the complete commentary from verse 21 through 23.

सूरा आयत 21 तफ़सीर (टिप्पणी)