लिप्यंतरण:( Wa iny yureedooo any-yakhda'ooka fainna hasbakal laah; Huwal lazeee aiyadaka binasrihee wa bilmu'mineen )
और अगर वे सुलह (शांति) की तरफ़ झुकें, तो तुम भी उसकी तरफ़ झुको और अल्लाह पर भरोसा करो। बेशक, वही है जो सुनने वाला, जानने वाला है [138]।
इस आयत में हुक्म है कि अगर दुश्मन सुलह की तरफ़ झुकें, तो मुसलमान भी उसे क़ुबूल करें। मगर यह शर्त के साथ है कि सुलह मुसलमानों के लिए फ़ायदेमंद और मुनासिब हो।
आख़िर में यह ताकीद की गई कि अल्लाह पर भरोसा रखो, क्योंकि वही सबकी नीयतों और अंजाम को जानता है।
The tafsir of Surah Al-Anfal verse 62 by Ibn Kathir is unavailable here.
Please refer to Surah Anfal ayat 61 which provides the complete commentary from verse 62 through 63.

सूरा आयत 62 तफ़सीर (टिप्पणी)