Quran Quote  : 

कुरान मजीद-8:66 सुरा हिंदी अनुवाद, लिप्यंतरण और तफ़सीर (तफ़सीर).

ٱلۡـَٰٔنَ خَفَّفَ ٱللَّهُ عَنكُمۡ وَعَلِمَ أَنَّ فِيكُمۡ ضَعۡفٗاۚ فَإِن يَكُن مِّنكُم مِّاْئَةٞ صَابِرَةٞ يَغۡلِبُواْ مِاْئَتَيۡنِۚ وَإِن يَكُن مِّنكُمۡ أَلۡفٞ يَغۡلِبُوٓاْ أَلۡفَيۡنِ بِإِذۡنِ ٱللَّهِۗ وَٱللَّهُ مَعَ ٱلصَّـٰبِرِينَ

लिप्यंतरण:( Al'aana khaffafal laahu 'ankum wa 'alima anna feekum da'faa; fa-iny yakum minkum mi'atun saabiratuny yaghliboo mi'atayn; wa iny-yakum minkum alfuny yaghlibooo alfaini bi iznil laah; wallaahu ma'as saabireen )

अब अल्लाह ने तुम्हारा बोझ हल्का कर दिया और वह जानता है कि तुम में कमजोरी है [147]। तो अगर तुम में सौ सब्र करने वाले होंगे तो वे दो सौ पर ग़ालिब आ जाएंगे, और अगर तुम में हज़ार होंगे तो वे दो हज़ार पर अल्लाह के हुक्म से ग़ालिब होंगे [148]। और अल्लाह सब्र करने वालों के साथ है।

सूरा आयत 66 तफ़सीर (टिप्पणी)



  • मुफ़्ती अहमद यार खान

📖 सूरा अल-अनफ़ाल – आयत 66 की तफ़्सीर

✅ [147] इंसानी कमजोरी के लिए ताख़्फ़ीफ़

इस आयत में पहले के हुक्म की ताख़्फ़ीफ़ की गई। पहले मुसलमानों को हुक्म था कि एक मोमिन दस कुफ़्फ़ार का मुक़ाबला करे, लेकिन अब अल्लाह ने उनकी हालत को देखते हुए यह बोझ हल्का कर दिया और एक बनाम दो कर दिया। यहाँ कमजोरी से मुराद ईमान की नहीं, बल्कि जिस्मानी और इंसानी ताक़त की कमी है। यह अल्लाह की रहमत और अपने बन्दों पर उसकी रहनुमाई का सबूत है।

✅ [148] असली ग़लबा अल्लाह के इज़्न से

फतह-ओ-नुसरत संख्या या ज़ाहिरी ताक़त पर नहीं, बल्कि अल्लाह के इज़्न और मदद पर मुनहसर है। अल्लाह चाहे तो कमज़ोर को मज़बूत पर ग़ालिब कर दे। इसी लिए अल्लाह ने फ़रमाया कि वह सब्र करने वालों के साथ है। सब्र ही असली हिम्मत और अल्लाह की मदद पाने की कुंजी है।

Ibn-Kathir

The tafsir of Surah Al-Anfal verse 66 by Ibn Kathir is unavailable here.
Please refer to Surah Anfal ayat 64 which provides the complete commentary from verse 64 through 66.

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