लिप्यंतरण:( Wa iny-yureedoo khiyaa nataka faqad khaanullaaha min qablu fa amkana minhum; wallaahu 'Aleemun Hakeem )
और अगर वह तुम्हें धोखा देना चाहें [159], तो उन्होंने इससे पहले अल्लाह को भी धोखा दिया है। अतः अल्लाह ने तुम्हें उन पर क़ाबू दे दिया [160]। और अल्लाह सब कुछ जानने वाला, हिकमत वाला है।
यह आयत उन क़ैदियों के बारे में है जो ज़ाहिरी तौर पर इस्लाम क़बूल कर लेते, लेकिन बाद में कुफ़्र की तरफ़ लौट जाते। अल्लाह तआला ने रसूलुल्लाह ﷺ को तसल्ली दी कि ऐसे लोग पहले भी अल्लाह से अहद तोड़ चुके हैं — यानी "आलम-ए-अरवाह" में लिए गए वचन को भी भुला चुके। जब अल्लाह के साथ किये गए सबसे बड़े अहद में ये सच्चे न रहे, तो दुनिया के अहदों में भी इनका धोखा कोई अजीब बात नहीं।
जैसे अल्लाह ने मुसलमानों को बद्र में ग़लबा और दुश्मनों पर क़ाबू अता किया, वैसे ही आगे भी अल्लाह इन धोखेबाज़ों को दोबारा मुसलमानों के क़ाबू में लाने पर क़ादिर है। अल्लाह उनके इरादों से पूरी तरह आगाह है और उसकी हिकमत हर काम को इंसाफ़ और दुरुस्त नतीजे तक पहुँचाती है।
The tafsir of Surah Al-Anfal verse 71 by Ibn Kathir is unavailable here.
Please refer to Surah Anfal ayat 70 which provides the complete commentary from verse 70 through 71.

सूरा आयत 71 तफ़सीर (टिप्पणी)