लिप्यंतरण:( Wallazeena aamanoo min ba'du wa haajaroo wa jaahadoo ma'akum fa Ulaaa'ika minkum; wa ulul arhaami baduhum awlaa biba'din fee Kitaabil laah; innal laaha bikulli shai'in 'Aleem )
और जो लोग बाद में ईमान लाए [169], और हिजरत की और तुम्हारे साथ जिहाद किया – वे भी तुम ही में से हैं। और रिश्तेदार एक-दूसरे के हक़ में अल्लाह की किताब में ज़्यादा हक़दार हैं [170]। निस्संदेह अल्लाह हर चीज़ को जानने वाला है।
इस आयत में उन लोगों का ज़िक्र है जो बाद में ईमान लाए और हिजरत की। अल्लाह ने फ़रमाया कि वे भी उसी उम्मत और भाईचारे का हिस्सा हैं और उनका दर्जा भी पिछले मुहाजिरीन और अंसार के साथ है। इसमें शामिल हैं:
इस आयत से यह हक़ीक़त सामने आती है कि ईमान और अमल से जुड़ने वाला हर शख़्स उम्मत में शामिल है और उसे वही सवाब और दर्जा मिलेगा।
फिर अल्लाह तआला ने हुक्म बयान फ़रमाया कि अब विरासत में अस्ल हक़दार रिश्तेदार हैं। पहले दौर में हिजरत और ईमान की बुनियाद पर भाईचारे से विरासत मिलती थी, लेकिन यह हुक्म अब मंसूख़ (रद्द) कर दिया गया। अब कुछ अहम बातें वाज़ेह होती हैं:
यह आयत रूहानी भाईचारे और क़ानूनी हक़ूक़ दोनों को बैलेंस करती है और दिखाती है कि अल्लाह का इल्म और हिकमत हर चीज़ पर हावी है।
The tafsir of Surah Al-Anfal verse 75 by Ibn Kathir is unavailable here.
Please refer to Surah Anfal ayat 74 which provides the complete commentary from verse 74 through 75.

सूरा आयत 75 तफ़सीर (टिप्पणी)