लिप्यंतरण:( Fa immaa tasqafannahum fil harbi fasharrid bihim man khalfahum la'allahum yazzakkaroon )
तो अगर तुम उन्हें जंग में कहीं पाओ तो उन्हें इस तरह क़त्ल करो कि उनके पीछे वाले भाग खड़े होकर भाग जाएँ [130], शायद वे नसीहत हासिल करें।
इस आयत में हुक्म है कि जब ऐसे ख़ियानत करने वाले दुश्मन जंग में मिलें तो उन्हें इस क़दर सख़्ती और ग़लबा से मारो कि बाक़ी लोग भी ख़ौफ़ज़दा होकर भाग जाएँ और दोबारा दुश्मनी करने से बाज़ आएँ।
लेकिन इस्लाम ने जंग के लिए सख़्त उसूल भी बताए:
मक़सद सिर्फ़ इतना है कि ख़ियानत करने वाले सबक़ लें और आगे फिर ग़द्दारी करने की हिम्मत न कर सकें।
The tafsir of Surah Al-Anfal verse 57 by Ibn Kathir is unavailable here.
Please refer to Surah Anfal ayat 55 which provides the complete commentary from verse 55 through 57.

सूरा आयत 57 तफ़सीर (टिप्पणी)