Quran Quote  : 

कुरान मजीद-8:33 सुरा हिंदी अनुवाद, लिप्यंतरण और तफ़सीर (तफ़सीर).

وَمَا كَانَ ٱللَّهُ لِيُعَذِّبَهُمۡ وَأَنتَ فِيهِمۡۚ وَمَا كَانَ ٱللَّهُ مُعَذِّبَهُمۡ وَهُمۡ يَسۡتَغۡفِرُونَ

लिप्यंतरण:( Wa maa kaanal laahu liyu'az zibahum wa anta feehim; wa maa kaanal laahu mu'az zibahum wa hum yastaghfiroon )

और अल्लाह उन्हें अज़ाब नहीं देगा,
जब तक कि तुम (ऐ नबी ﷺ) उनके दरमियान मौजूद हो [66],
और अल्लाह उन्हें अज़ाब नहीं देगा,
जब तक वे मग़फ़िरत माँगते रहें [67]।

सूरा आयत 33 तफ़सीर (टिप्पणी)



  • मुफ़्ती अहमद यार खान

📖 सूरा अल-अनफ़ाल – आयत 33 की तफ़्सीर

✅ [66] नबी ﷺ की मौजूदगी रहमत और हिफ़ाज़त

यह आयत बताती है कि मक़्क़ा के काफ़िरों पर
अल्लाह ने अज़ाब को टाल दिया,
क्योंकि रसूलुल्लाह ﷺ उनके बीच मौजूद थे।
आप ﷺ की मौजूदगी ही रहमत और अमानत थी।
जैसा कि फ़रमाया गया:
“हमने आपको सारी दुनिया के लिए रहमत बनाकर भेजा” (21:107)।
उलमा ने बयान किया कि नबी ﷺ की क़ुर्बत
हिफ़ाज़त और रहमत का सबब बनती है,
यहाँ तक कि आपकी क़ब्र के पास रहने वालों के लिए भी।

✅ [67] इस्तिग़फ़ार अज़ाब से बचाव का ज़रिया

दूसरा हिफ़ाज़ती सबब इस्तिग़फ़ार है।
जब तक लोग अल्लाह से तौबा और माफी माँगते हैं,
अल्लाह अज़ाब को टाल देता है।
हज़रत अली (रज़ि.) ने फ़रमाया:
“उम्मत को दो अमानतें दी गईं —
एक नबी ﷺ की मौजूदगी, और दूसरी इस्तिग़फ़ार।”
अब जबकि नबी ﷺ हमारे दरमियान नहीं हैं,
तो इस्तिग़फ़ार क़यामत तक अज़ाब से बचाव का सहारा रहेगा।

Ibn-Kathir

The tafsir of Surah Al-Anfal verse 33 by Ibn Kathir is unavailable here.
Please refer to Surah Anfal ayat 31 which provides the complete commentary from verse 31 through 33.

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