लिप्यंतरण:( Law laa Kitaabum minal laahi sabaqa lamassakum fee maaa akhaztum 'azaabun 'azeem )
अगर अल्लाह का पहले से लिखा हुआ हुक्म [153] न होता, तो जो फ़िदया तुमने कुफ़्फ़ार से लिया है उस पर तुमको बड़ा अज़ाब छू जाता।
यह आयत ग़ज़वा-ए-बद्र के कैदियों से लिए गए फ़िदये के बारे में नाज़िल हुई। अल्लाह ने साफ़ फ़रमा दिया कि अगर पहले से मग़फ़िरत और आसानी का हुक्म न लिखा होता तो यह अमल सख़्त अज़ाब का सबब बनता।
The tafsir of Surah Al-Anfal verse 68 by Ibn Kathir is unavailable here.
Please refer to Surah Anfal ayat 67 which provides the complete commentary from verse 67 through 69.

सूरा आयत 68 तफ़सीर (टिप्पणी)