लिप्यंतरण:( Wa'lamooo annamaaa amwaalukum wa awlaadukum fitnatunw wa annal laaha 'indahooo ajrun azeem )
और जान लो कि तुम्हारे माल और तुम्हारी औलाद बस एक आज़माइश हैं [58],
और अल्लाह के पास है बड़ा अजर [59]।
अल्लाह ने साफ़ फ़रमाया कि माल-दौलत और औलाद दोनों ही इम्तिहान हैं।
ये इंसान को अल्लाह की याद से ग़ाफ़िल कर सकते हैं।
मुसलमान का काम है कि माल को अल्लाह की राह में खर्च करे
और औलाद की नेकी और तर्बियत का ख्याल रखे,
ताकि वो मरने के बाद भी माँ-बाप के लिए दुआ करें।
जो लोग इन इम्तिहानों में कामयाब होते हैं,
अल्लाह उनके लिए बड़ा अजर रखता है।
अगर इंसान अक़्लमंदी से माल और औलाद की जिम्मेदारी निभाए,
तो यही आज़माइशें नेकी का ज़रिया बन जाती हैं।
The tafsir of Surah Al-Anfal verse 28 by Ibn Kathir is unavailable here.
Please refer to Surah Anfal ayat 27 which provides the complete commentary from verse 27 through 28.

सूरा आयत 28 तफ़सीर (टिप्पणी)