लिप्यंतरण:( 'Ainaiy yashrabu bihal muqarraboon )
\"एक चश्मा जिससे चुने हुए लोग पिएंगे।\"
🔹 जन्नत के आम रहने वालों को शराबन तहोरा और रहीक मख़तूम दिया जाएगा, जिसमें तसनीम की कुछ बूंदें मिलाई जाएंगी ताकि उसकी ख़ुशबू और लज़्ज़त बढ़ जाए।
🔹 लेकिन अल्लाह के ख़ास बंदे इस पाकीज़ा पेय को बिना किसी मिलावट के, अपनी असली शक्ल में पीने की नेमत पाएंगे।
🔹 उनके जन्नती महलों में तसनीम के चश्मे (झरने) होंगे, जिनसे बे-मिसाल लज़्ज़त और ख़ुशबू वाला पानी बहता रहेगा।
🔹 इस पेय की असली हक़ीक़त इंसानी दिमाग़ में नहीं आ सकती। यह एक ऐसी नेमत है, जिसकी लज़्ज़त और असर को बस वही समझ सकते हैं, जिन्हें जन्नत में इसे पीने का मौक़ा मिलेगा।
🔹 अल्लाह हमें तसनीम के चश्मे से पीने की इज़्ज़त अता करे! 🤲
The tafsir of Surah Mutaffifin verse 28 by Ibn Kathir is unavailable here.
Please refer to Surah Mutaffifin ayat 18 which provides the complete commentary from verse 18 through 28.

सूरा आयत 28 तफ़सीर (टिप्पणी)