Quran Quote  :  Never did Allah take unto Himself any son, nor is there any god other than He. -

कुरान मजीद-4:112 सुरा हिंदी अनुवाद, लिप्यंतरण और तफ़सीर (तफ़सीर).

وَمَن يَكۡسِبۡ خَطِيٓـَٔةً أَوۡ إِثۡمٗا ثُمَّ يَرۡمِ بِهِۦ بَرِيٓـٔٗا فَقَدِ ٱحۡتَمَلَ بُهۡتَٰنٗا وَإِثۡمٗا مُّبِينٗا

लिप्यंतरण:( Wa mai yaksib khateee'atan aw isman summa yarmi bihee bareee'an faqadih tamala buhtaananw wa ismam mubeenaa )

और जो कोई किसी गलती या गुनाह का जिम्मेदार हो, फिर उसे किसी बेक़सूर पर थोप दे, तो वह यक़ीनन बहुत बड़ा बोहतान और खुला गुनाह उठाता है [346]।

सूरा आयत 112 तफ़सीर (टिप्पणी)



  • मुफ़्ती अहमद यार खान

📖 सूरा अन-निसा – आयत 112 की तफ़्सीर

 

✅ [346] बेक़सूर पर इल्ज़ाम लगाना बहुत बड़ा गुनाह है

इस आयत में "गुनाह" से मुराद बड़े गुनाह हैं, और "गलती" से मुराद छोटे गुनाह। किसी बेक़सूर पर झूठा इल्ज़ाम लगाना—चाहे वह मुसलमान हो या ग़ैर-मुसलमान—ज़ुल्म और खुला नाफ़रमानी का काम है। यह हुक्म उस वाक़े के सिलसिले में नाज़िल हुआ जिसमें तम्आ नामी शख़्स ने अपने गुनाह को छुपाने के लिए एक बेगुनाह यहूदी पर इल्ज़ाम लगाया था। क़ुरआन इस किस्म के अमल की सख़्त मज़म्मत करता है, क्योंकि झूठा इल्ज़ाम लगाना बोहतान भी है और बड़ा गुनाह भी। इस आयत से यह उसूल साबित होता है कि हक़ और इंसाफ़ किसी की मज़हबी पहचान से ऊपर है, और किसी पर झूठा इल्ज़ाम लगाना अल्लाह के नज़दीक बहुत संगीन गुनाह है।

Ibn-Kathir

The tafsir of Surah Nisa verse 112 by Ibn Kathir is unavailable here.
Please refer to Surah Nisa ayat 110 which provides the complete commentary from verse 110 through 115.

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