Quran Quote  : 

कुरान मजीद-4:143 सुरा हिंदी अनुवाद, लिप्यंतरण और तफ़सीर (तफ़सीर).

مُّذَبۡذَبِينَ بَيۡنَ ذَٰلِكَ لَآ إِلَىٰ هَـٰٓؤُلَآءِ وَلَآ إِلَىٰ هَـٰٓؤُلَآءِۚ وَمَن يُضۡلِلِ ٱللَّهُ فَلَن تَجِدَ لَهُۥ سَبِيلٗا

लिप्यंतरण:( Muzabzabeena baina zaalika laaa ilaa haaa' ulaaa'i wa laaa ilaa haaa'ulaaa'; wa mai yudli lillaahu falan tajida lahoo sabeela )

ये (मुनाफ़िक़) लोग झूलते रहते हैं — कभी इधर, कभी उधर, न पूरी तरह मुसलमानों के साथ होते हैं, न काफ़िरों के साथ [422]। और जिसे अल्लाह गुमराह कर दे, उसके लिए तुम हरगिज़ कोई राह नहीं पा सकते।

सूरा आयत 143 तफ़सीर (टिप्पणी)



  • मुफ़्ती अहमद यार खान

📖 सूरा अन-निसा – आयत 143 की तफ़्सीर

 

✅ [422] मुनाफ़िक़ — न इधर के न उधर के

इस आयत में मुनाफ़िक़ों की दोमुंही और डगमगाई हुई हालत को बयान किया गया है।

  • ये लोग ना तो सच्चे मोमिन होते हैं,
  • और ना ही खुले तौर पर काफ़िरों के साथ होते हैं
    बल्कि मुसलमानों के बीच रहते हुए,
    दिल से कुफ़्र और दुश्मनी छुपाए रखते हैं
    यह कोई तीसरी वैध श्रेणी (category) नहीं है —
    असल में ये मुनाफ़िक़, अल्लाह के नज़दीक काफ़िर ही हैं,
    लेकिन दुनियावी पहचान में मुसलमान समझे जाते हैं

इससे यह हिदायत मिलती है कि:

  • वो फ़िरक़े या गुट जो इस्लाम के बुनियादी अकीदों का इनकार करें,
    भले ही समाज में मुसलमान माने जाएं,
    हक़ीक़त में गुमराही में पड़े होते हैं
  • ऐसे लोग 'ना इधर के रहते हैं, ना उधर के',
    और अल्लाह के नज़दीक उनका कोई मुक़ाम नहीं होता

✅ जिसे अल्लाह गुमराह कर दे, उसे कोई राह नहीं दिखा सकता

इस आयत का आख़िरी हिस्सा बहुत सख़्त चेतावनी है:
अगर कोई शख़्स बार-बार हक़ को ठुकराए,
फरेब और मुनाफ़िक़त में डूबा रहे,
तो अल्लाह उसे उसके हाल पर छोड़ देता है,
और फिर कोई नबी, वली या आलिम भी उसे राह नहीं दिखा सकता
हिदायत सिर्फ़ अल्लाह का इनआम है, जो सच्चे तालिबों को मिलता है
हम सबको चाहिए कि हमेशा दुआ करें:
"ऐ अल्लाह! हमें हिदायत पर क़ायम रख और मुनाफ़िक़त से बचा"।

आमीन।

Ibn-Kathir

The tafsir of Surah Nisa verse 143 by Ibn Kathir is unavailable here.
Please refer to Surah Nisa ayat 142 which provides the complete commentary from verse 142 through 143.

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