लिप्यंतरण:( Wa mai yaf'al zaalika 'udwaananw wa zulman fasawfa nusleehi Naaraa; wa kaana zaalika 'alal laahi yaseeraa )
और जो कोई यह काम ज़्यादती और नाइंसाफ़ी के साथ करेगा, तो हम उसे यक़ीनन आग में दाख़िल करेंगे [120], और यह अल्लाह के लिए बहुत आसान है।
यह आयत उन लोगों के लिए सख़्त चेतावनी है जो:
अल्लाह साफ़ फ़रमाता है:
जो ज़ुल्म और ज्यादती के साथ ऐसा करेगा,
उसे जहन्नम में डाल दिया जाएगा — और यह अल्लाह के लिए कोई मुश्किल बात नहीं।
लेकिन:
इस आयत में "नाइंसाफ़ी" की शर्त यह भी दिखाती है कि:
अगर कोई जान इस्लामी क़ानून के तहत ली गई हो, जैसे:
यह फर्क इंसाफ़ को क़ायम करता है,
और बग़ैर कानून के अपनी मनमानी से क़त्ल करने को रोकता है।
The tafsir of Surah Nisa verse 30 by Ibn Kathir is unavailable here.
Please refer to Surah Nisa ayat 29 which provides the complete commentary from verse 29 through 31.

सूरा आयत 30 तफ़सीर (टिप्पणी)