Quran Quote  : 

कुरान मजीद-4:164 सुरा हिंदी अनुवाद, लिप्यंतरण और तफ़सीर (तफ़सीर).

وَرُسُلٗا قَدۡ قَصَصۡنَٰهُمۡ عَلَيۡكَ مِن قَبۡلُ وَرُسُلٗا لَّمۡ نَقۡصُصۡهُمۡ عَلَيۡكَۚ وَكَلَّمَ ٱللَّهُ مُوسَىٰ تَكۡلِيمٗا

लिप्यंतरण:( Wa Rusulan qad qasas naahum 'alaika min qablu wa Rusulal lam naqsushum 'alaik; wa kallamallaahu Moosaa takleemaa )

और कुछ रसूल ऐसे हैं जिनका हम आपसे पहले ज़िक्र कर चुके हैं [469], और कुछ ऐसे रसूल भी हैं जिनका हमने आपसे ज़िक्र नहीं किया। और अल्लाह ने मूसा से वाक़ई बातचीत की [470]।

सूरा आयत 164 तफ़सीर (टिप्पणी)



  • मुफ़्ती अहमद यार खान

📖 सूरा अन-निसा – आयत 164 की तफ़्सीर

 

✅ [469] कुछ रसूलों का ज़िक्र हुआ, कुछ का नहीं

इस आयत में यह स्पष्ट किया गया है कि सभी नबियों का नाम और विवरण कुरआन में नहीं दिया गया, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि हुज़ूर ﷺ उन्हें नहीं जानते

  • हुज़ूर ﷺ को अल्लाह ने तमाम नबियों का इल्म दिया है — चाहे उनका नाम कुरआन में ज़िक्र हुआ हो या नहीं।
  • सूरा हूद (11:120) में कहा गया कि कुरआन में नबियों के किस्से उद्देश्यपूर्ण और नसीहत के लिए दर्ज हैं, न कि पूरे विवरण के लिए।
  • मिअराज की रात, हुज़ूर ﷺ ने तमाम नबियों की इमामत की, जो इस बात का सबूत है कि:
    • आप तमाम नबियों से जुड़े हुए हैं, और
    • तमाम नबियों पर आपका रूहानी और दीन में ऊँचा मुक़ाम है

📌 नसीहत:
किसी नबी का नाम कुरआन में न आने का मतलब यह नहीं कि वह नबी नहीं थे
वह़ी (ईश्वरीय संदेश) ज़रूरत के मुताबिक और समय पर उतारी जाती रही है।

✅ [470] अल्लाह ने मूसा (अलैहिस्सलाम) से बातचीत की

इस वाक्य में दो अहम बातें हैं:

  1. हज़रत मूसा (अलैहिस्सलाम) को बनी इसराईल के नबियों में विशेष दर्जा हासिल है
    • अल्लाह ने उनसे सीधे बातचीत की, जो कि बहुत बड़ा सम्मान है
    • इस वजह से उन्हें कलीमुल्लाह कहा जाता है — यानी वह जो अल्लाह से बात करने वाले हैं
  2. हर नबी को अल्लाह ने अलग-अलग विशेषताओं से नवाज़ा
    • यह सोच ग़लत है कि हर नबी को हर गुण प्राप्त हुआ हो
    • जैसे हज़रत ईसा (अलैहिस्सलाम) बग़ैर पिता के पैदा हुए,
      और हुज़ूर ﷺ की पीठ पर मोहर-ए-नबूवत थी,
      वैसे ही हज़रत मूसा (अलैहिस्सलाम) को अल्लाह से प्रत्यक्ष संवाद का विशेष दर्जा मिला।

Ibn-Kathir

The tafsir of Surah Nisa verse 164 by Ibn Kathir is unavailable here.
Please refer to Surah Nisa ayat 163 which provides the complete commentary from verse 163 through 165.

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