Quran Quote  :  We have a Book with Us that speaks the truth(about everyone); and they shall in no wise be wronged. -

कुरान मजीद-4:28 सुरा हिंदी अनुवाद, लिप्यंतरण और तफ़सीर (तफ़सीर).

يُرِيدُ ٱللَّهُ أَن يُخَفِّفَ عَنكُمۡۚ وَخُلِقَ ٱلۡإِنسَٰنُ ضَعِيفٗا

लिप्यंतरण:( Yureedul laahu ai yukhaffifa 'ankum; wa khuliqal insaanu da'eefaa )

अल्लाह चाहता है कि वह तुम्हारे लिए आसानी पैदा करे, और इंसान को कमज़ोर पैदा किया गया है [116]।

सूरा आयत 28 तफ़सीर (टिप्पणी)



  • मुफ़्ती अहमद यार खान

📖 सूरह अन-निसा – आयत 28 की तफ़्सीर

 

✅ आसानी के लिए बनाए गए हैं ईश्वरीय नियम

इस आयत में यह भरोसा दिलाया गया है कि इस्लामी क़ानून,
ख़ासकर विवाह और शराफ़त से संबंधित नियम,
इंसानी कमज़ोरियों को ध्यान में रखकर बनाए गए हैं।
अल्लाह अपने बंदों पर उनकी सामर्थ्य से ज़्यादा बोझ नहीं डालता,
बल्कि उन्हें पाकीज़ा और संभालने योग्य रास्ता दिखाता है।

✅ इंसानी फितरत निर्भर और कमज़ोर होती है [116]

"इंसान को कमज़ोर पैदा किया गया है" — इस वाक्य का मतलब है कि:
मर्द और औरत एक-दूसरे के बिना अधूरे हैं।
उनकी जज़्बाती, जिस्मानी और समाजिक ज़रूरतें आपस में गहराई से जुड़ी हुई हैं।
इसी वजह से:
विवाह से संबंधित नियमों को विस्तार और स्पष्टता के साथ बताया गया है,
ताकि इंसान बेबाकी या गुमराही में न पड़े,
बल्कि एक संतुलित और वैध रास्ते से अपनी ज़रूरतों को पूरा करे।

Ibn-Kathir

The tafsir of Surah Nisa verse 28 by Ibn Kathir is unavailable here.
Please refer to Surah Nisa ayat 26 which provides the complete commentary from verse 26 through 28.

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