Quran Quote  : 

कुरान मजीद-4:152 सुरा हिंदी अनुवाद, लिप्यंतरण और तफ़सीर (तफ़सीर).

وَٱلَّذِينَ ءَامَنُواْ بِٱللَّهِ وَرُسُلِهِۦ وَلَمۡ يُفَرِّقُواْ بَيۡنَ أَحَدٖ مِّنۡهُمۡ أُوْلَـٰٓئِكَ سَوۡفَ يُؤۡتِيهِمۡ أُجُورَهُمۡۚ وَكَانَ ٱللَّهُ غَفُورٗا رَّحِيمٗا

लिप्यंतरण:( Wallazeena aamanoo billaahi wa Rusulihee wa lam yufarriqoo baina ahadim minhum ulaaa'ika sawfa yu'teehim ujoorahum; wa kaanal laahu Ghafoorar Raheema )

और जो लोग अल्लाह और उसके रसूलों पर ईमान लाते हैं और उनमें से किसी के बीच फ़र्क़ नहीं करते, तो अल्लाह जल्द ही उन्हें उनका इनाम अता करेगा [437]। और अल्लाह बहुत बख़्शने वाला, बेहद रहमत वाला है [438].

सूरा आयत 152 तफ़सीर (टिप्पणी)



  • मुफ़्ती अहमद यार खान

📖 सूरा अन-निसा – आयत 152 की तफ़्सीर

 

✅ [437] चुनी हुई नबूवत पर ईमान का इनकार

यह आयत यहूद (Yahud) और नसारा (Nasara) के रवैये का रद्द करती है,
जो कुछ पैग़म्बरों को मानते थे और कुछ का इनकार करते थे—
ख़ासकर हमारे प्यारे नबी मुहम्मद ﷺ की नबूवत का इन्कार

सच्चा ईमान तब मुकम्मल होता है जब सभी रसूलों को बिना किसी अपवाद के स्वीकार किया जाए
जैसे किसी एक रसूल का इनकार ईमान को ख़त्म कर देता है,
वैसे ही सभी सहाबा और रसूल ﷺ के अहले-बैत का भी अदब और मोहब्बत ज़रूरी है

कुछ से मोहब्बत और कुछ से दुश्मनी रखना — यह यहूद के दोहरे मिज़ाज की विरासत है,
और इसका इस्लाम में कोई हिस्सा नहीं है।

✅ [438] इनाम का आधार है सच्चा ईमान

इस आयत का दूसरा हिस्सा एक गहरी रूहानी सच्चाई को बयान करता है:
अमलों का इनाम सिर्फ़ ज़ाहिरी कामों पर नहीं, बल्कि सच्चे ईमान और नेक नीयत पर मिलता है

जो लोग सही ईमान के साथ, दिल से दीन को अपनाते हैं,
उनके लिए अल्लाह की रहमत और मग़फ़िरत का वादा है।
अल्लाह बख़्शने वाला है, रहमत करने वाला है,
और वह सच्चे मोमिनों को उनका पूरा इनाम ज़रूर देगा।

Ibn-Kathir

The tafsir of Surah Nisa verse 152 by Ibn Kathir is unavailable here.
Please refer to Surah Nisa ayat 150 which provides the complete commentary from verse 150 through 152.

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