Quran Quote  : 

कुरान मजीद-4:72 सुरा हिंदी अनुवाद, लिप्यंतरण और तफ़सीर (तफ़सीर).

وَإِنَّ مِنكُمۡ لَمَن لَّيُبَطِّئَنَّ فَإِنۡ أَصَٰبَتۡكُم مُّصِيبَةٞ قَالَ قَدۡ أَنۡعَمَ ٱللَّهُ عَلَيَّ إِذۡ لَمۡ أَكُن مَّعَهُمۡ شَهِيدٗا

लिप्यंतरण:( Wa inna minkum lamal la yubatti'anna fa in asaabatkum museebatun qaala qad an'amal laahu 'alaiya iz lam akum ma'ahum shaheeda )

और निश्चय ही तुममें कोई (मुनाफ़िक़) ऐसा है जो पीछे रह जाएगा [232] फिर अगर तुम पर कोई मुसीबत आ पड़े, तो कहेगा कि यह अल्लाह का मुझ पर अनुग्रह था कि मैं उनके साथ मौजूद नहीं था [233]

सूरा आयत 72 तफ़सीर (टिप्पणी)



  • मुफ़्ती अहमद यार खान

📖 सूरह अन-निसा – आयत 72 की तफ़्सीर

 

✅ [232] इबादत में सुस्ती – मुनाफ़िक़त की निशानी

इस आयत का यह हिस्सा मुनाफ़िक़ों की ओर इशारा करता है, जो खासकर नमाज़, जिहाद और सामूहिक फ़र्ज़ों में सुस्ती और टालमटोल के लिए जाने जाते हैं। इस तरह इस्लामी ज़िम्मेदारियों में पीछे रहना मुनाफ़िक़त की पहचान है। सच्चे ईमान वाले आज़माइश के वक्त आगे बढ़ते हैं, जबकि मुनाफ़िक़ हमेशा कुर्बानी से बचने के बहाने ढूंढते हैं।

✅ [233] गैरमौजूदगी पर खुशी – कुफ्र की अलामत

जब मुसलमानों पर कोई मुसीबत — जैसे हार, कठिनाई या जंग में नुक़सान — आती है, तो ये मुनाफ़िक़ खुशी और राहत जताते हुए कहते हैं कि अल्लाह का मुझ पर बड़ा अनुग्रह हुआ कि मैं उनके साथ नहीं था। इससे हमें सबक मिलता है कि मुसलमानों की तकलीफ़ पर खुश होना और उनसे दूर रहना कुफ्र की एक सूरत है। मुसलमान के लिए ज़रूरी है कि ईमान और अमल दोनों में उम्मत के साथ रहे। जैसे कहा गया है — जो भेड़ झुंड के साथ रहती है, वह भेड़ियों से महफ़ूज़ रहती है। यह एकता, आपसी सहयोग और उम्मत के साथ हर हाल में मौजूद रहने की अहमियत को दर्शाता है।

Ibn-Kathir

The tafsir of Surah Nisa verse 72 by Ibn Kathir is unavailable here.
Please refer to Surah Nisa ayat 71 which provides the complete commentary from verse 71 through 74.

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