लिप्यंतरण:( Alam ta'lam annallaaha lahoo mulkus samaawaati wal ard; wa maa lakum min doonil laahi minw waliyyinw wa laa naseer )
"क्या तुम नहीं जानते कि आसमानों और ज़मीन की बादशाही अल्लाह ही की है [211], और अल्लाह के सिवा तुम्हारा न कोई मददगार है और न ही कोई सहारा [212]?"
📌 सीख:
ये आयत इंसानों को तफ़क्कुर (ग़ौर) की दावत देती है — कि अल्लाह जिस चीज़ को चाहे,
जिस वक़्त चाहे, जिस तरह चाहे — अपने इख़्तियार से हुक्म करता है।
📖 अल्लाह फ़रमाता है:
"तुम्हारा दोस्त सिर्फ़ अल्लाह है, और उसका रसूल, और वो मोमिन जो नमाज़ क़ायम करते हैं..." (सूरह अल-मायदा 5:55)
इसलिए फर्क़ साफ़ समझना ज़रूरी है:
➤ "अल्लाह के सिवा दोस्त" = बुत, झूठे मददगार (जिन पर अल्लाह ने लानत भेजी)
➤ "अल्लाह के दोस्त" = पैग़म्बर, औलिया, सालेहीन (जो अल्लाह की मर्ज़ी से मदद करते हैं)
🔑 नुक्ता:
जो अल्लाह की मर्ज़ी के ख़िलाफ़ मदद देने का दावा करे — वो ग़लत और बेअसर है।
मगर जो अल्लाह की मर्ज़ी से मदद करें, वो उसी का हिस्सा है।
The tafsir of Surah Baqarah verse 107 by Ibn Kathir is unavailable here.
Please refer to Surah Baqarah ayat 107 which provides the complete commentary from verse 106 through 107.
सूरा आयत 107 तफ़सीर (टिप्पणी)