Quran Quote  : 

कुरान मजीद-2:208 सुरा हिंदी अनुवाद, लिप्यंतरण और तफ़सीर (तफ़सीर).

يَـٰٓأَيُّهَا ٱلَّذِينَ ءَامَنُواْ ٱدۡخُلُواْ فِي ٱلسِّلۡمِ كَآفَّةٗ وَلَا تَتَّبِعُواْ خُطُوَٰتِ ٱلشَّيۡطَٰنِۚ إِنَّهُۥ لَكُمۡ عَدُوّٞ مُّبِينٞ

लिप्यंतरण:( Yaaa ayyuhal lazeena aamanud khuloo fis silmi kaaaffatanw wa laa tattabi'oo khutuwaatish Shaitaan; innahoo lakum 'aduwwum mubeen )

208. "ऐ मोमिनों! पूरा पूरा इस्लाम (धर्म) अपना लो [482], और शैतान के क़दमों पर न चलो [483]. निःसंदेह वह तुम्हारा साफ़ साफ़ दुश्मन है।" [484]

सूरा आयत 208 तफ़सीर (टिप्पणी)



  • मुफ़्ती अहमद यार खान

[482] इस्लाम को पूरी तरह अपनाना — आधा-अधूरा नहीं

  • यह आयत हज़रत अब्दुल्लाह इब्न सलाम (रहमतुल्लाह अलैह) से जुड़ी घटना के संदर्भ में नाज़िल हुई।
  • वह यहूदी नेता थे जो इस्लाम कबूल करने के बाद भी अपनी पुरानी आदत से ऊंट का मांस खाना नहीं चाहते थे, क्योंकि वे सोचते थे यह अच्छा नहीं।
  • अल्लाह तआला ने साफ़ किया कि इस्लाम को पूरी तरह अपनाना ज़रूरी है, न कि पुरानी धार्मिक मान्यताओं को साथ लेकर।
  • सच्चा मोमिन वही है जो इस्लामी हुक्मों को पूरी ईमानदारी और पूरी निष्ठा से अपनाता है।

[483] शैतान के नक़ल से बचना — पहचान और पहचान बनाए रखना

  • कुछ लोग बिना सोचे-समझे दूसरे मज़हब या गैर-मुस्लिमों की आदतें अपनाने लगते हैं, जैसे दाढ़ी न रखना, या उनके कपड़े पहनना
  • यह इस्लामी पहचान को कमजोर करता है और शैतान के निशाने पर ले आता है।
  • जैसे गंदे गिलास से साफ़ पानी पीना ठीक नहीं, उसी तरह इस्लाम में भी भीतर और बाहर दोनों तरफ बदलाव चाहिए
  • शैतान के क़दमों पर चलना मतलब है, दूसरों की धार्मिक या सांस्कृतिक आदतों की नकल करना — जो कि सही रास्ते से भटकना है।

[484] शैतान का साफ़ साफ़ दुश्मन होना

  • शैतान तुम्हारा खुला दुश्मन है — वह हमेशा तुम्हें सही रास्ते से भटकाने की कोशिश करता है।
  • दूसरों के धर्मों या तरीकों को अपनाना शैतान की चालों में फंसना है।
  • उदाहरण के तौर पर:
    • यहूदियों की तरह ऊंट का मांस न खाना।
    • हिंदुओं को खुश करने के लिए किसी रस्म को छोड़ देना।
    • मिक्सड इलाकों में अज़ान कम या बंद कर देना।
  • ये सब गलतियां हैं क्योंकि ये इस्लाम की जगह दूसरों के रीति-रिवाजों को महत्व देना है, जो शैतान को पसंद है।

नतीजा (सबक़):
👉 इस्लाम को पूरी तरह से स्वीकार करो और जियो।
👉 अपनी पहचान और इस्लामी नसीहतों को छोड़कर दूसरों की नक़ल मत करो।
👉 शैतान के जाल में न फँसो, क्योंकि वह तुम्हारा खुला दुश्मन है।

Ibn-Kathir

The tafsir of Surah Baqarah verse 207 by Ibn Kathir is unavailable here.
Please refer to Surah Baqarah ayat 204 which provides the complete commentary from verse 204 through 207.

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