लिप्यंतरण:( Tilka ummatun qad khalat lahaa maa kasabat wa lakum maa kasabtum wa laa tus'aloona 'ammaa kaano ya'maloon (section 16, End Juz 1) )
"वो एक उम्मत थी जो गुज़र चुकी; उनके लिए वो है जो उन्होंने कमाया [284], और तुम्हारे लिए वो है जो तुमने कमाया, और तुमसे उनके आमाल के बारे में नहीं पूछा जाएगा।"
📌 मतलब:
गुज़रे हुए नेक लोग तुम्हारे लिए फ़ायदे का ज़रिया तब बनेंगे जब तुम उनके रास्ते पर चलोगे — सिर्फ़ नाम लेने से कुछ नहीं होगा।
📌 इस्लाम का उसूल है:
ज़िम्मेदारी फर्द (individual) की है।
📌 हर इंसान अपनी अख़लाक़ी और दीनदारी की जवाबदेही खुद देगा —
ना किसी की नेकी से तुम्हारा काम चलेगा,
ना किसी के गुनाह से तुम पर इल्ज़ाम आएगा।
1. विरासत नहीं, अमल मायने रखता है:
पिछली उम्मतों की नेकी से तब तक फ़ायदा नहीं, जब तक इंसान खुद सही राह पर ना चले।
2. हक़ बात ये है:
हर इंसान अपने आमाल का खुद मालिक है,
और आख़िरत में जवाबदेही भी उसी की होगी।
3. किसी को गुमराह करने की सज़ा:
अगर कोई किसी को गुमराही की तरफ़ ले जाए,
तो उसका गुनाह भी उस पर लिखा जाएगा।
4. नेक लोगों के नाम पर दावा करना काफी नहीं:
कहना कि "हम फलां रसूल के मानने वाले हैं" — जब तक उनके तरीके पर ना चलो, ये दावा बेकार है।
The tafsir of Surah Baqarah verse 140 by Ibn Kathir is unavailable here.
Please refer to Surah Baqarah ayat 139 which provides the complete commentary from verse 139 through 141.
सूरा आयत 141 तफ़सीर (टिप्पणी)