Quran Quote  : 

कुरान मजीद-2:265 सुरा हिंदी अनुवाद, लिप्यंतरण और तफ़सीर (तफ़सीर).

وَمَثَلُ ٱلَّذِينَ يُنفِقُونَ أَمۡوَٰلَهُمُ ٱبۡتِغَآءَ مَرۡضَاتِ ٱللَّهِ وَتَثۡبِيتٗا مِّنۡ أَنفُسِهِمۡ كَمَثَلِ جَنَّةِۭ بِرَبۡوَةٍ أَصَابَهَا وَابِلٞ فَـَٔاتَتۡ أُكُلَهَا ضِعۡفَيۡنِ فَإِن لَّمۡ يُصِبۡهَا وَابِلٞ فَطَلّٞۗ وَٱللَّهُ بِمَا تَعۡمَلُونَ بَصِيرٌ

लिप्यंतरण:( Wa masalul lazeena yunfiqoona amwaalahu mubtighaaa'a mardaatil laahi wa tasbeetam min anfusihim kamasali jannatim birabwatin asaabahaa waabilun fa aatat ukulahaa di'faini fa il lam yusibhaa waabilun fatall; wallaahu bimaa ta'maloona Baseer )

265. और उन लोगों की मिसाल जो अल्लाह की रज़ा (खुशी) के लिए और अपने दिलों को मजबूत करने के लिए माल खर्च करते हैं [697], एक ऊँचे मैदान में लगे उस बाग़ जैसी है [698], जिस पर तेज़ बारिश हो तो वो दोगुना फल देता है। और अगर उस पर तेज़ बारिश न भी हो, तो ओस (हल्की नमी) ही काफ़ी हो जाती है [699]। और अल्लाह देख रहा है जो कुछ तुम करते हो [700]।

सूरा आयत 265 तफ़सीर (टिप्पणी)



  • मुफ़्ती अहमद यार खान

आयत 265 (सूरह अल-बक़रह) — तफ़सीर और समझ

"265. और उन लोगों की मिसाल जो अल्लाह की रज़ा (खुशी) के लिए और अपने दिलों को मजबूत करने के लिए माल खर्च करते हैं [697], एक ऊँचे मैदान में लगे उस बाग़ जैसी है [698], जिस पर तेज़ बारिश हो तो वो दोगुना फल देता है। और अगर उस पर तेज़ बारिश न भी हो, तो ओस (हल्की नमी) ही काफ़ी हो जाती है [699]। और अल्लाह देख रहा है जो कुछ तुम करते हो [700]।"

[697] अल्लाह की रज़ा के लिए खर्च करना — सच्ची नेकी

यहाँ उन लोगों की बात हो रही है जो सिर्फ़ अल्लाह की ख़ुशी के लिए दान करते हैं।
ऐसे लोग:

  • दिखावे के लिए नहीं, बल्कि अल्लाह को राज़ी करने के लिए खर्च करते हैं।
  • और उनका मक़सद होता है कि उनका दिल ईमान और नेकी में मज़बूत हो।

इससे सीख मिलती है कि दान सिर्फ़ ज़कात तक सीमित नहीं होना चाहिए — खाना, कपड़ा, माल या मदद, जो भी अल्लाह के रास्ते में दिया जाए, सब क़ीमती है।

[698] ऊँचे मैदान में बाग़ — सच्ची नीयत का फल

यहाँ एक बहुत प्यारी मिसाल दी गई है:
सच्चे मोमिन की नेकी उस बाग़ जैसी है जो ऊँचे और साफ़ जगह पर है, जहाँ पानी अच्छे से पहुँचता है।
जब उस पर तेज़ बारिश होती है, तो वो बाग़ दोगुना फल देता है।

इसका मतलब है कि अगर किसी की नीयत सच्ची हो और माहौल (जगह और वक़्त) भी अच्छा हो, तो उसका सवाब कई गुना बढ़ जाता है

[699] थोड़ी सी नमी भी काफ़ी — नीयत सबसे अहम

अगर उस बाग़ पर तेज़ बारिश न भी हो, लेकिन ओस (हल्की नमी) हो, तो भी वो फल देता है।
यह बताता है कि कम दान भी अल्लाह के यहाँ क़ीमती है अगर नीयत साफ़ हो

यहाँ ये सिखाया गया है कि:

  • दान की मात्रा नहीं, नीयत मायने रखती है
  • दिल की पाकीज़गी से ही नेकी में बरकत आती है।

[700] अल्लाह सब कुछ देख रहा है

इस आयत के आख़िर में बहुत ही ज़ोरदार बात कही गई — "अल्लाह देख रहा है जो कुछ तुम करते हो।"

इसका मतलब है:

  • तुम्हारे हर नेक काम, नीयत, और छुपी हुई कोशिशें — सब अल्लाह के नज़र में हैं।
  • और वह इन्साफ़ के साथ उनका बदला देगा।

यह हमें याद दिलाता है कि हम किसी से तारीफ़ की उम्मीद न रखें, बस अल्लाह के लिए करें

Ibn-Kathir

The tafsir of Surah Baqarah verse 264 by Ibn Kathir is unavailable here.
Please refer to Surah Baqarah ayat 262 which provides the complete commentary from verse 262 through 264.

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