Quran Quote  : 

कुरान मजीद-2:139 सुरा हिंदी अनुवाद, लिप्यंतरण और तफ़सीर (तफ़सीर).

قُلۡ أَتُحَآجُّونَنَا فِي ٱللَّهِ وَهُوَ رَبُّنَا وَرَبُّكُمۡ وَلَنَآ أَعۡمَٰلُنَا وَلَكُمۡ أَعۡمَٰلُكُمۡ وَنَحۡنُ لَهُۥ مُخۡلِصُونَ

लिप्यंतरण:( Qul atuhaaajjoonanaa fil laahi wa Huwa Rabbunaa wa Rabbukum wa lanaa a'maalunaa wa lakum a'maalukum wa nahnu lahoo mukhlisoon )

"कह दीजिए (ऐ मुहम्मद): क्या तुम हमसे अल्लाह के बारे में झगड़ते हो [279], हालाँकि वो हमारा रब भी है और तुम्हारा रब भी? हमारे लिए हमारे आमाल, और तुम्हारे लिए तुम्हारे आमाल हैं। और हम उसी के लिए खालिस हैं [280]।"

सूरा आयत 139 तफ़सीर (टिप्पणी)



  • मुफ़्ती अहमद यार खान

[279] "क्या तुम हमसे अल्लाह के बारे में झगड़ते हो..."

  • इस आयत में अल्लाह तआला यहूद को जवाब दे रहे हैं, जो ये कहते थे कि अगर नबूवत सच्ची होती, तो वो बनी इसराईल में से ही आती।
  • अल्लाह फरमाते हैं: अल्लाह तो सबका रब है — हमारा भी और तुम्हारा भी — वो किसी कौम का मोहताज नहीं।
  • हिदायत नस्ल या क़बीले की बुनियाद पर नहीं मिलती, बल्कि अमल और सच्चे ईमान से मिलती है।

📌 सबक़: जो लोग रसूल ﷺ के मक़ाम को झुठलाते हैं, असल में वो अल्लाह की हिकमत और फैसले पर एतराज़ कर रहे होते हैं।

[280] "हमारे लिए हमारे आमाल, और तुम्हारे लिए तुम्हारे आमाल हैं। और हम उसी के लिए खालिस हैं।"

  • यहाँ मुसलमानों का एलान है: हमारा अमल सिर्फ़ अल्लाह के लिए है — न दिखावे के लिए, न किसी और को राज़ी करने के लिए।
  • "हम उसी के लिए खालिस हैं" का मतलब है — हम अपने दिल, नियत, और अमल सबकुछ अल्लाह ही के लिए रखते हैं।

📌 लेकिन असल इख़लास (sincerity) का मतलब क्या है?

👉 वो यह कि अल्लाह के रसूल ﷺ से भी पूरी वफ़ादारी और इताअत (obedience) हो।
क्योंकि जैसा अल्लाह ने फ़रमाया:
📖 "जिसने रसूल की इताअत की, उसने अल्लाह की इताअत की।" (सूरह 4, आयत 80)

🚫 अगर कोई कहे कि वो अल्लाह से तो मोहब्बत करता है लेकिन रसूल ﷺ की इताअत नहीं करता — तो ये झूठी और अधूरी मोहब्बत है।

🌟 इस आयत से मिलने वाले अहम सबक़:

1. अल्लाह सबका रब है:
वो सिर्फ़ एक क़ौम या जात का नहीं — हर इंसान का रब है। इसलिए नबूवत का फैसला भी उसी का हक़ है।

2. अमल की ज़िम्मेदारी अलग-अलग है:
हर इंसान के लिए उसके अपने आमाल का हिसाब है। ना कोई नस्ल बचा सकती है, ना रिश्ता।

3. इख़लास का असली मतलब:
अल्लाह के लिए खालिस होने का मतलब है — अल्लाह और उसके रसूल ﷺ दोनों की पूरी इताअत।

4. रसूल ﷺ की इताअत = अल्लाह की इताअत:
जो रसूल को न माने, वो अल्लाह की भी इताअत नहीं कर रहा — चाहे ज़बान से कुछ भी कहे।

Ibn-Kathir

The tafsir of Surah Baqarah verse 138 by Ibn Kathir is unavailable here.
Please refer to Surah Baqarah ayat 137 which provides the complete commentary from verse 137 through 138.

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