लिप्यंतरण:( Wazkurul laaha feee ayyaamin ma'doodaatin; faman ta'ajjala fee yawmaini falaaa ismaa 'alaihi wa man ta akhara falaaa isma 'alayhi; limanit-taqaa; wattaqul laaha wa'lamooo annakum ilaihi tuhsharoon )
[203] "और अल्लाह को उन गिने-चुने दिनों में याद करो (9 ज़िल-हिज्ज़ के बाद के 3 दिन) [475]। जो कोई 2 दिनों में जल्दी चले जाए तो उस पर कोई गुनाह नहीं, और जो तीसरे दिन तक ठहरे भी तो उस पर भी कोई गुनाह नहीं, बशर्ते वह अल्लाह से डरने वाला हो [476]। और अल्लाह से डरो और यक़ीन रखो कि तुम्हें उसी की ओर लौटना है।"
तशरीक के दिनों में याद रखना
यह "गिने-चुने दिन" तशरीक के दिन हैं — 9 ज़िल-हिज्ज़ की फज्र से लेकर 13 ज़िल-हिज्ज़ के असर तक। इन दिनों में मिना में अल्लाह की याद रखना ज़रूरी है, खासकर तकबीर के ज़रिए, क्योंकि 10वें दिन जमरतुल ‘उक्बा पर पत्थर मारने के बाद तलबियाह ख़त्म हो जाती है। यहाँ अल्लाह की तजदीद (महिमा) का ज़िक्र है, जो हज के मुख्य रस्मों के बाद आध्यात्मिक जागरूकता जारी रखने का रास्ता है।
जल्दी या देर से विदाई दोनों जायज़ हैं
हाजी मिना से 2 दिन (12 ज़िल-हिज्ज़) के बाद विदा हो सकते हैं या 13 तक ठहर सकते हैं — दोनों इजाज़तशुदा हैं, जब तक वे तक़्वा (अल्लाह का डर और परहेज़गारी) बनाए रखें। 13वें दिन पत्थर मारना (रमी) ज़व्वाल से पहले किया जा सकता है, जैसा कि इस्लामी फिक़ह में बताया गया है। लेकिन extra दिन ठहरने का इरादा ईमानदार होना चाहिए — यानी अल्लाह की ख़ुशी के लिए, ना कि दिखावा या दुनियावी लाभ के लिए।
The tafsir of Surah Baqarah verse 202 by Ibn Kathir is unavailable here.
Please refer to Surah Baqarah ayat 200 which provides the complete commentary from verse 200 through 202.
सूरा आयत 203 तफ़सीर (टिप्पणी)