लिप्यंतरण:( Tilkar Rusulu faddalnaa ba'dahum 'alaa ba'd; minhum man kallamal laahu wa rafa'a ba'dahum darajaat; wa aatainaa 'Eesab na Maryamal baiyinaati wa ayyadnaahu bi Roohil Qudus; wa law shaaa'al laahu maqtatalal lazeena mimba'dihim mim ba'di maa jaaa'athumul baiyinaatu wa laakinikh talafoo faminhum man aamana wa minhum man kafar; wa law shaaa'al laahu maq tataloo wa laakinnallaaha yaf'alu maa yureed )
253. "इन रसूलों में से हम कुछ को कुछ पर उच्चता दी है [641]। उनमें से कुछ ऐसे हैं जिनसे अल्लाह ने बात की [642], और कुछ को درجات में सम्मानित किया [643]। हमने ईसा, मरियम के पुत्र [644], को स्पष्ट निशानियाँ दीं और उन्हें पवित्र आत्मा (जिब्राइल) [645] से सहायता दी। यदि अल्लाह चाहता, तो जो लोग उनके बाद आए थे, वे स्पष्ट प्रमाण प्राप्त करने के बावजूद एक-दूसरे से न लड़ते। लेकिन वे भिन्न हुए; उनमें से कुछ ने ईमान लाया, जबकि कुछ ने कुपंथिता अपनाई। यदि अल्लाह चाहता, तो वे नहीं लड़ते [646], लेकिन अल्लाह वही करता है जो वह चाहता है।" 647
[641] पैगंबरों के बीच उच्चता
[642] अल्लाह ने हज़रत मूसा से बात की
[643] कुछ को उच्च दर्जा दिया
[644] ईसा (अलैहिस्सलाम) — मरियम के पुत्र
[645] जिब्राइल (अलैहिस्सलाम) से मदद
[646] अनुयायियों के बीच मतभेद
[647] अल्लाह की इच्छा और संघर्ष
यह आयत हमें बताती है कि अल्लाह ने अपने पैगंबरों को अलग-अलग दर्जा और सम्मान दिया है। हमें चाहिए कि हम सभी पैगंबरों का आदर करें और अल्लाह की मर्जी को समझते हुए अपने जीवन में ईमान के साथ कदम बढ़ाएँ। यह आयत यह भी सिखाती है कि संघर्ष और मतभेद भले ही हो, लेकिन अल्लाह की इच्छा से ही ये घटनाएँ घटित होती हैं, और हमें उस पर विश्वास रखना चाहिए।
The tafsir of Surah Baqarah verse 252 by Ibn Kathir is unavailable here.
Please refer to Surah Baqarah ayat 250 which provides the complete commentary from verse 250 through 252.
सूरा आयत 253 तफ़सीर (टिप्पणी)