Quran Quote  : 

कुरान मजीद-2:132 सुरा हिंदी अनुवाद, लिप्यंतरण और तफ़सीर (तफ़सीर).

وَوَصَّىٰ بِهَآ إِبۡرَٰهِـۧمُ بَنِيهِ وَيَعۡقُوبُ يَٰبَنِيَّ إِنَّ ٱللَّهَ ٱصۡطَفَىٰ لَكُمُ ٱلدِّينَ فَلَا تَمُوتُنَّ إِلَّا وَأَنتُم مُّسۡلِمُونَ

लिप्यंतरण:( Wa wassaa bihaaa Ibraaheemu baneehi wa Ya'qoob, yaa baniyya innal laahas tafaa lakumud deena falaa tamootunna illaa wa antum muslimoon )

132. और इब्राहिम ने अपने बेटों को हिदायत दी, और याकूब ने भी ऐसा ही कहा: "हे मेरे बेटों! बेशक अल्लाह ने तुम्हारे लिए यह (धर्म) चुना है, इसलिए मुसलमान होकर ही मरना।" [265]

सूरा आयत 132 तफ़सीर (टिप्पणी)



  • मुफ़्ती अहमद यार खान

  1. और इब्राहिम ने अपने बेटों को हिदायत दी, और याकूब ने भी ऐसा ही कहा: "हे मेरे बेटों! बेशक अल्लाह ने तुम्हारे लिए यह (धर्म) चुना है, इसलिए मुसलमान होकर ही मरना।" [265]

[265]

  • इस आयत में हज़रत इब्राहिम (अस) और हज़रत याकूब (अस) ने अपने बेटों को साफ़ हिदायत दी कि अल्लाह ने तुम्हारे लिए धर्म चुना है।
  • यह धर्म हज़रत इब्राहिम (अस) का तौहीदी (एकेश्वरवादी) धर्म है।
  • उन्होंने अपने बच्चों से कहा कि वे अपनी ज़िन्दगी इस धर्म पर मजबूती से बिताएं और मुसलमान (अल्लाह की आज़ी से पूरी तरह समर्पित) बनकर ही मरें।
  • यहाँ "मुसलमान" का मतलब है वे लोग जो दिल से अल्लाह की मर्ज़ी को मानते और पूरी आज़ी से झुक जाते हैं।
  • इस आयत से सीख मिलती है कि सच्ची कामयाबी केवल मुसलमान बनकर जीना नहीं, बल्कि मुसलमान बनकर मरना है।
  • हमें भी दुआ करनी चाहिए कि अल्लाह हमें सच्चा ईमान अता करे और आख़िरी वक्त तक मुसलमान रहने की तौफ़ीक़ दे। आमीन।

Ibn-Kathir

The tafsir of Surah Baqarah verse 131 by Ibn Kathir is unavailable here.
Please refer to Surah Baqarah ayat 130 which provides the complete commentary from verse 130 through 132.

Sign up for Newsletter