लिप्यंतरण:( Tilka Aayaatul laahi natloohaa 'alaika bilhaqq; wa innaka laminal mursaleen )
252):
"यह अल्लाह की आयतें हैं जिन्हें (हे प्रियतम!) हम आपको सही-सही सुनाते हैं, और निश्चय ही आप रसूलों में से हैं।" [640]
निष्कर्ष:
यह आयत नबी ﷺ के कर्तव्य और उनके प्रेषण (नुबूवत) की सत्यता को प्रकट करती है, यह बताती है कि अल्लाह द्वारा भेजी गई वाणी पूरी तरह सही और प्रमाणिक है। यह एक आधिकारिक घोषणापत्र है कि नबी ﷺ सचमुच अल्लाह के रसूल हैं और जो कुछ वे सुनाते हैं, वह ईश्वरीय सत्य है।
The tafsir of Surah Baqarah verse 251 by Ibn Kathir is unavailable here.
Please refer to Surah Baqarah ayat 250 which provides the complete commentary from verse 250 through 252.
सूरा आयत 252 तफ़सीर (टिप्पणी)