Quran Quote  : 

कुरान मजीद-2:43 सुरा हिंदी अनुवाद, लिप्यंतरण और तफ़सीर (तफ़सीर).

وَأَقِيمُواْ ٱلصَّلَوٰةَ وَءَاتُواْ ٱلزَّكَوٰةَ وَٱرۡكَعُواْ مَعَ ٱلرَّـٰكِعِينَ

लिप्यंतरण:( Wa aqeemus salaata wa aatuz zakaata warka'oo ma'ar raaki'een )

[43] और नमाज़ क़ायम करो [83], और ज़कात अदा करो, और झुकने वालों के साथ झुको (इबादत और आज़मानी में) [84]।

सूरा आयत 43 तफ़सीर (टिप्पणी)



  • मुफ़्ती अहमद यार खान

🔹 [83] नमाज़ पहले, ज़कात बाद में

  • इस आयत में सबसे पहले नमाज़ का ज़िक्र है:
    • क्योंकि ईमान के बाद सबसे अहम फ़र्ज़ नमाज़ है।
    • “नमाज़ क़ायम करो” का मतलब सिर्फ़ पढ़ लेना नहीं,
      बल्कि उसे समय पर, अच्छे तरीके से, और दिल से अदा करना है।

✅ यह तालीम देती है कि:

  • नमाज़ सिर्फ़ एक रस्म नहीं,
  • बल्कि इबादत का दिल है — हर दिन अल्लाह से सीधा रिश्ता जोड़ने का ज़रिया।

🔸 ज़कात: माल की पाकी और समाज की भलाई

  • ज़कात देने का हुक्म बताता है कि:
    • दीन सिर्फ़ इबादत नहीं,
    • बल्कि माल की ज़िम्मेदारी भी है।
  • ज़कात देने से:
    • माल पाक होता है,
    • गरीबों की मदद होती है,
    • और समाज में इंसाफ़ कायम होता है।

🔹 [84] झुकने वालों के साथ झुको — जमाअत की ताक़त

  • इस हिस्से का मक़सद है:
    • नमाज़ जमाअत के साथ अदा करना।
    • “रुकू करने वालों के साथ रुकू करो” — यानी अकेले नहीं, बल्कि मुसलमानों के साथ मिलकर नमाज़ पढ़ो।

✅ इस से तीन बातें समझ में आती हैं:

  1. जमाअत की नमाज़ ज़्यादा सवाब वाली होती है।
  2. अगर कोई शख्स इमाम के रुकू में शामिल हो गया, तो रकअत मिल जाती है
  3. जमाअत में एक की नमाज़ अगर कबूल हो जाए, तो अल्लाह की रहमत से सबकी हो सकती है।

✅ सबक़

  1. नमाज़ को दिल और नियम से अदा करना हर मुसलमान की पहली जिम्मेदारी है।
  2. ज़कात देना माल की पाकीज़गी और समाज की ज़रूरत है।
  3. जमाअत से नमाज़ पढ़ना सिर्फ़ सवाब नहीं, बल्कि एकता और भाईचारे की निशानी है।

Ibn-Kathir

The tafsir of Surah Baqarah verse 43 by Ibn Kathir is unavailable here.
Please refer to Surah Baqarah ayat 42 which provides the complete commentary from verse 42 through 43.

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