लिप्यंतरण:( Awalaa ya'lamoona annal laaha ya'lamu maa yusirroona wa maa yu'linoon )
[77] क्या वे नहीं जानते कि अल्लाह जानता है जो कुछ वे छिपाते हैं और जो कुछ वे ज़ाहिर करते हैं? [138]
अल्लाह सब जानता है — छुपा हुआ भी और ज़ाहिर भी:
यह आयत यहूदियों को याद दिलाती है कि वे जो कुछ भी अपने दिलों में छिपाते हैं या ज़बान से कहते हैं — अल्लाह उसे पूरी तरह जानता है।
वे लोग जो नबी करीम ﷺ के बारे में अपनी किताबों में लिखी गई सच्चाई को छिपाते थे, उन्हें यह चेतावनी दी गई है कि अल्लाह की नज़र से कुछ भी छुपा नहीं। यह चेतावनी आज के मुसलमानों के लिए भी है — अगर कोई नबी की शान और ज़िक्र से लोगों को रोकता है या उसे कमतर दिखाने की कोशिश करता है, तो वह भी उसी गलत रवैये को अपनाता है जो पहले यहूदियों ने अपनाया था।
The tafsir of Surah Baqarah verse 77 by Ibn Kathir is unavailable here.
Please refer to Surah Baqarah ayat 75 which provides the complete commentary from verse 75 through 77.
सूरा आयत 77 तफ़सीर (टिप्पणी)