लिप्यंतरण:( Fabaddalal lazeena zalamoo qawlan ghairal lazee qeela lahum fa anzalnaa 'alal lazeena zalamoo rijzam minas samaaa'i bimaa kaanoo yafsuqoon )
[59] लेकिन ज़ालिमों ने उस बात को बदल डाला [106] उस चीज़ के अलावा किसी और बात से जो उनसे कही गई थी। तो हमने उनके ऊपर आसमान से एक आज़ाब [वबा] [107] भेजा, क्योंकि वे हुक्म से खुले तौर पर नाफरमानी कर रहे थे।
इस आयत में बताया गया कि बनी इसराईल को एक ख़ास अल्फ़ाज़ — "हित्ततुन" (हमें माफ़ कर दे) — कहने को कहा गया था,
मगर उन्होंने उसे बदलकर मज़ाकिया लहजे में "हिन्ततुन" (यानि 'गेहूँ दो') कह दिया।
👉 अल्लाह के दिए हुए अल्फ़ाज़, जैसे दुरूद, वज़ीफ़े या कलिमे,
शैख़ या पैग़म्बर की बताई हुई शक्ल में ही पढ़ने चाहिए।
इन्हें बदलना, काटना, या मज़ाक़ बनाना — ज़ालिमी और गुस्ताख़ी है।
इस गुस्ताख़ी की वजह से अल्लाह ने आसमान से एक वबा (plague) भेजी —
जिसके नतीजे में 24,000 बनी इसराईल फौरन हलाक हो गए।
👉 हदीसों में आता है कि:
📌 यह आयत हमें बताती है कि:
ना-फ़रमानी, गुनाहों की बढ़ोतरी, और अल्फ़ाज़ की बेहुरमती — ये सब बड़ी आफ़तों और बिमारियों का कारण बनते हैं।
The tafsir of Surah Baqarah verse 59 by Ibn Kathir is unavailable here.
Please refer to Surah Baqarah ayat 58 which provides the complete commentary from verse 58 through 59.
सूरा आयत 59 तफ़सीर (टिप्पणी)