लिप्यंतरण:( Wa lillaahi maa fissamaawaati wa maa fil ard; wa ilal laahi turja'ul umoor )
जो कुछ आसमानों में है और जो कुछ ज़मीन में है, सब अल्लाह ही का है, और सारे मामले उसी की ओर लौटाए जाएँगे।
इस आयत में अल्लाह की तमाम मख़लूक़ पर उसकी मालिकियत और हुकूमत का एलान किया गया है। आसमान और ज़मीन में जो कुछ है — ज़ाहिरी हो या पोशीदा, जानदार हो या बेजान — सब कुछ उसी के क़ब्जे में है। सिर्फ़ वही मालिक नहीं, बल्कि हर मसला आख़िरकार उसी की अदालत में पेश होगा।
कोई भी उसकी पकड़ से बाहर नहीं, और न कोई ज़ुल्म दबा रहेगा, न कोई हक़ नज़रअंदाज़ होगा। हर अमल, हर झगड़ा, हर मुक़द्दर का फ़ैसला वही करेगा। यह आयत ज़ालिमों के लिए चेतावनी है, और मज़लूमों के लिए दिलासा, कि आख़िरी इंसाफ़ अल्लाह ही करेगा — पूरा और बिल्कुल सही।
The tafsir of Surah Imran verse 109 by Ibn Kathir is unavailable here.
Please refer to Surah Imran ayat 104 which provides the complete commentary from verse 104 through 109.

सूरा आयत 109 तफ़सीर (टिप्पणी)