लिप्यंतरण:( Qaala Rabbij 'al leee Aayatan qaala Aaayatuka allaa tukalliman naasa salaasata ayyaamin illa ramzaa; wazkur Rabbaka kaseeranw wa sabbih bil'ashiyyi wal ibkaar )
उसने कहा: ऐ मेरे रब! मेरे लिए कोई निशानी बना दे [90]। उसने फ़रमाया: तेरी निशानी यह होगी कि तू लोगों से तीन दिन तक इशारे के सिवा कोई बात नहीं करेगा, और तू अपने रब को बहुत ज़िक्र कर [91], और शाम और सुबह उसकी तस्बीह कर [92]।
हज़रत ज़करिय्या (अलैहिस्सलाम) ने अपने रब से यह दुआ की कि उन्हें कोई ऐसी निशानी दी जाए जिससे उन्हें पता चल सके कि उनकी पत्नी गर्भवती हो गई हैं, ताकि वे इस नेमत पर पूरी तरह अल्लाह की याद में लीन होकर शुक्र अदा कर सकें।
इससे दो बातें निकलती हैं:
हालाँकि अल्लाह का ज़िक्र हर वक़्त फ़ज़ीलत वाला है, लेकिन सुबह और शाम के वक़्त ज़िक्र की खास अहमियत है, क्योंकि इन वक़्तों में फ़रिश्ते भी हाज़िर होते हैं। जैसा कि बयान हुआ: “निःसंदेह, कुरआन की फज्र की तिलावत में फ़रिश्ते मौजूद होते हैं।” (सूरह बनी इसराईल, 17:78)
इन वक़्तों में तमाम मख़लूकात अल्लाह की तस्बीह करती है।
The tafsir of Surah Imran verse 41 by Ibn Kathir is unavailable here.
Please refer to Surah Imran ayat 38 which provides the complete commentary from verse 38 through 41.

सूरा आयत 41 तफ़सीर (टिप्पणी)