लिप्यंतरण:( Wa Rasoolan ilaa Baneee Israaa'eela annee qad ji'tukum bi Aayatim mir Rabbikum annee akhluqu lakum minatteeni kahai 'atittairi fa anfukhu feehi fayakoonu tairam bi iznil laahi wa ubri'ul akmaha wal abrasa wa uhyil mawtaa bi iznil laahi wa unabbi'ukum bimaa taakuloona wa maa taddakhiroona fee buyootikum; inna fee zaalika la Aayatal lakum in kuntum mu'mineen )
और वह बनी इसराईल की तरफ़ रसूल होगा [103], वह कहेगा: “मैं तुम्हारे पास तुम्हारे रब की तरफ़ से एक निशानी लेकर आया हूँ [104], कि मैं मिट्टी से एक पक्षी की शक्ल बनाता हूँ [105], फिर उसमें फूँक मारता हूँ [106] तो वह अल्लाह के हुक्म से ज़िंदा हो जाता है [107]। और मैं जन्मजात अंधों और कोढ़ियों को शिफ़ा देता हूँ [108] [109], और अल्लाह के हुक्म से मुर्दों को ज़िंदा करता हूँ [110]। और मैं तुम्हें वह बातें बताता हूँ जो तुम खाते हो और जो अपने घरों में जमा करके रखते हो [111]। बेशक, इसमें तुम्हारे लिए निशानियाँ हैं अगर तुम ईमान लाओ।”
हज़रत ईसा (अलैहिस्सलाम) को सिर्फ़ बनी इसराईल की तरफ़ भेजा गया था, सारी इंसानियत की तरफ़ नहीं।
इससे यह साबित होता है कि क़ुरैश, जो बनी इस्माईल से थे, उनकी रिसालत के दायरे में नहीं आते थे, और वह हज़रत इब्राहीम (अलैहिस्सलाम) के दीन पर क़ायम रहे जब तक कि रसूलुल्लाह ﷺ ना आ गए।
इस आयत में हज़रत ईसा (अलैहिस्सलाम) के कई मोज़ज़ात (चमत्कार) गिनाए गए हैं, जो उनकी नबूवत को साबित करते हैं।
पहले की शरीअतों में किसी जानदार की तस्वीर बनाना मना नहीं था।
हज़रत ईसा (अलैहिस्सलाम) मिट्टी से परिंदे की शक्ल बनाते, और यह महज़ हुनर नहीं, बल्कि अल्लाह की कुदरत का मोज़ज़ा था।
फिर वे उस पर फूँक मारते, और वह परिंदा अल्लाह के हुक्म से ज़िंदा हो जाता।
यह दिखाता है कि पैग़म्बरों और औलिया की साँस और दुआ में भी अल्लाह की बरकत से असर होता है।
हर मोज़ज़े के साथ हज़रत ईसा (अलैहिस्सलाम) यह बात ज़रूर कहते कि यह सब कुछ अल्लाह के हुक्म से हो रहा है, जिससे उनकी अल्लाह के सामने पूरी आजिज़ी और बंदगी ज़ाहिर होती है।
वे पैदाइशी अंधों और कोढ़ के मरीज़ों को शिफ़ा देते, जो उस दौर की लाइलाज बीमारियाँ थीं।
यह साबित करता है कि अल्लाह के औलिया के ज़रिये भी शिफ़ा मुमकिन है, अगर वह अल्लाह के हुक्म से हो।
हज़रत ईसा (अलैहिस्सलाम) के दौर में तिब्ब (चिकित्सा विज्ञान) बहुत उन्नत था, इसलिए उनके मोज़ज़े भी इसी मैदान में हुए, ताकि ज़्यादा असरदार साबित हों।
इनमें शामिल हैं:
हज़रत ईसा (अलैहिस्सलाम) ने चार मशहूर लोगों को ज़िंदा किया:
हज़रत ईसा (अलैहिस्सलाम) लोगों को बताते थे:
The tafsir of Surah Imran verse 49 by Ibn Kathir is unavailable here.
Please refer to Surah Imran ayat 48 which provides the complete commentary from verse 48 through 51.

सूरा आयत 49 तफ़सीर (टिप्पणी)